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पहलगाम जैसे हमले बढ़ा सकते हैं परमाणु संघर्ष! अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने भारत-पाक रिश्तों पर दी चेतावनी

इंटेलिजेंस कमेटी के सामने पेश रिपोर्ट में नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर तुलसी गैबार्ड ने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए खतरे सामूहिक रूप से बढ़ने वाले हैं, जो अभी 3,000 से ज़्यादा मिसाइलों के रूप में हैं, वे 2035 तक बढ़कर 16,000 से ज़्यादा हो जाएंगे।

पहलगाम जैसे हमले बढ़ा सकते हैं परमाणु संघर्ष! अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने भारत-पाक रिश्तों पर दी चेतावनी
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वाशिंगटन/नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच भारत सहित पूरी दुनिया के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जो अमेरिका के लिए भी एक चेतावनी है। जिस पाकिस्तान को अपनी गोदी में बैठाकर अमेरिकी दुलार रहा है, उसी के लिए वह खतरा भी बन सकता है। US सीनेट में पेश की गई US इंटेलिजेंस कम्युनिटी की सालाना खतरे की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के संबंधों में परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है। अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड के एक चौंकाने वाले बयान से खलबली मच गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि पाकिस्तान अब ऐसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो सीधे तौर पर अमेरिका को निशाना बनाने में सक्षम हो सकती हैं। यह रिपोर्ट न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। इस दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भले ही दोनों देश सीधे युद्ध न चाहते हों, लेकिन सीमा पार से होने वाले आतंकी हमले किसी भी वक्त परमाणु चिंगारी भड़का सकते हैं।

दोनों पड़ोसियों में तनाव बढ़ने का खतरा

34 पन्नों की इस दस्तावेज़ में कहा गया है, "भारत-पाकिस्तान संबंधों में परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है। इसकी वजह अतीत के वे संघर्ष हैं जब ये दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश आमने-सामने आ गए थे, जिससे तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था। पिछले साल भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के पास हुए आतंकवादी हमले ने यह दिखा दिया कि आतंकवादी हमले किस तरह संघर्ष की चिंगारी भड़का सकते हैं।अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ़ तुलसी गबार्ड ने बुधवार को सांसदों से कहा कि पाकिस्तान के लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के प्रोग्राम में ऐसी मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं जो अमेरिका को निशाना बनाने में सक्षम हों।

अमेरिका की तरफ बढ़ रहा है मिसाइलों का खतरा

सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने अपनी रिपोर्ट में, नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर गबार्ड ने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए खतरे सामूहिक रूप से बढ़ने वाले हैं। अभी 3,000 से ज़्यादा मिसाइलें हैं, जो 2035 तक बढ़कर 16,000 से ज़्यादा हो जाएंगी। गबार्ड ने कहा, "अमेरिका की सुरक्षित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता, रणनीतिक खतरों के खिलाफ देश के भीतर सुरक्षा सुनिश्चित करती रहती है। हालांकि, रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान कई तरह के नए, आधुनिक या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च और डेवलपमेंट कर रहे हैं। इन मिसाइलों में परमाणु और पारंपरिक पेलोड लगे होते हैं, जो हमारे देश को अपनी मारक सीमा के दायरे में ले आते हैं। गैबार्ड ने कहा, "IC का आकलन है कि चीन और रूस ऐसे एडवांस्ड डिलीवरी सिस्टम बना रहे हैं जो यूएस मिसाइल डिफेंस को भेदने या उससे बच निकलने में सक्षम होंगे।"

'नॉर्थ कोरिया की ICBMs पहले से ही US तक पहुंच सकती हैं'

यूएस के टॉप इंटेलिजेंस अधिकारी ने कहा कि नॉर्थ कोरिया की ICBMs पहले से ही US की धरती तक पहुंच सकती हैं, और वह अपने न्यूक्लियर हथियारों के ज़खीरे को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। गैबार्ड ने कहा, "पाकिस्तान के लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट में संभावित रूप से ऐसी ICBMs शामिल हो सकती हैं, जिनकी मारक क्षमता इतनी हो कि वे हमारे देश पर हमला कर सकें।" उन्होंने कहा कि ईरान ने पहले भी स्पेस लॉन्च और दूसरी ऐसी टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया है जिसका इस्तेमाल करके वह 2035 से पहले एक सैन्य रूप से सक्षम ICBM बनाना शुरू कर सकता है, बशर्ते तेहरान इस क्षमता को हासिल करने की कोशिश करे। गैबार्ड ने कहा, "हालांकि, इन आकलनों को तब अपडेट किया जाएगा जब ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के ईरान की मिसाइल उत्पादन सुविधाओं, ज़खीरों और लॉन्च क्षमताओं पर हुए विनाशकारी हमलों का पूरा असर पता चल जाएगा।"


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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