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सुप्रीम कोर्ट ने छुआ 34 का आंकड़ा, पर इतने जजों में केवल एक महिला

इन 34 में से केवल एक महिला जज हैं। और वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना। वो भारत की पहली महिला सीजेआई बनने वाली हैं। सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों के पद स्वीकृत किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने छुआ 34 का आंकड़ा, पर इतने जजों में केवल एक महिला
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Photograph: (Google)

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्कः जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल पंचोली के आज शपथ लेने के साथ सर्वोच्च न्यायालय अब अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है। हालांकि इन 34 में से केवल एक महिला जज हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना। वो भारत की पहली महिला सीजेआई बनने वाली हैं।

सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों के पद स्वीकृत

सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों के पद स्वीकृत किए गए थे। जस्टिस अराधे और जस्टिस पंचोली को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश सीजेआी बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, जेके माहेश्वरी और बीवी नागरत्ना वाले कॉलेजियम की तरफ से की गई थी। केंद्र सरकार ने 27 अगस्त को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी थी।

जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर विवाद था

जस्टिस पंचोली की नियुक्ति पर कानूनी हलकों में काफी बहस हुई है, क्योंकि पंचोली हाईकोर्ट्स के जजों की वरिष्ठता सूची में केवल 57वें स्थान पर हैं। कॉलेजियम के सदस्य के रूप में, जस्टिस नागरत्ना ने पंचोली की पदोन्नति का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति न केवल न्याय प्रशासन के लिए प्रतिकूल होगी, बल्कि कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता को भी खतरे में डाल देगी।

जस्टिस पंचोली के लिए तीन महिला जजों जस्टिस सुनीता अग्रवाल, रेवती मोहिते डेरे और लिसा गिल की वरिष्ठता को अनदेखा किया गया। महिला जजों की अनदेखी के कॉलेजियम और केंद्र के फैसले की भी आलोचना हुई है। 2021 में जस्टिस हिमा कोहली, बेला त्रिवेदी और बीवी नागरत्ना की नियुक्ति के बाद से किसी भी महिला जज को शीर्ष न्यायालय में पदोन्नत नहीं किया गया है। जस्टिस पंचोली अब 2031 में भारत के 60वें सीजेआई के रूप में कार्य करने की कतार में हैं। उनका पैरेंटल हाईकोर्ट गुजरात है।

जानिए जस्टिस अराधे को

जस्टिस अराधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। उन्हें 2009 में मध्य प्रदेश का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था। 2011 में उन्हें स्थायी जज बनाया गया। 2016 में उनका तबादला जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट में हुआ। 2018 में उन्होंने तीन महीने तक इसके कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया। इसके बाद, उन्होंने 17 नवंबर, 2018 को कर्नाटक हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। 2022 में कुछ महीनों के लिए इसके कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया। जुलाई 2023 में, उन्हें तेलंगाना का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में उन्हें बॉम्बे स्थानांतरित कर दिया गया।

ये हैं जस्टिस विपुल पंचोली

जस्टिस पंचोली 1 अक्टूबर, 2014 को गुजरात उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने। 10 जून, 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। जुलाई 2023 में उनका पटना स्थानांतरण हुआ। गुजरात से पटना हाईकोर्ट में उनका स्थानांतरण विवादों में घिर गया था क्योंकि गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (जीएचसीएए) ने इसका विरोध किया था। तत्कालीन सीजेआी को लिखे एक पत्र में जीएचसीएए ने कहा था कि जस्टिस पंचोली में वो सभी गुण हैं जो एक अच्छे जज में होने चाहिए। विरोध के बावजूद स्थानांतरण हुआ और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी नियुक्ति तक पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया।

सर्वोच्च न्यायालय के 5 वरिष्ठतम जज जो कॉलेजियम सदस्य भी हैं, उनमें सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, जेके माहेश्वरी, बीवी नागरत्ना शामिल हैं।

Supreme Court, Justice Alok Aradhe, Justice Vipul Pancholi


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