पश्चिम एशिया संकट: होर्मुज स्ट्रेट में फंसी 3 लाख टन एलपीजी, सप्लाई पर पड़ सकता है असर
इस समय 6 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, और हर जहाज में करीब 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से करीब 3 लाख मीट्रिक टन एलपीजी (एलपीजी) इस समय होर्मुज स्ट्रेट में फंसी हुई है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में मौजूदा हालात के कारण एलपीजीलेकर जा रहे कई जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उनके अनुसार, इस समय 6 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, और हर जहाज में करीब 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है। उधर, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच विशेषज्ञों ने देश खासतौर से शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बिजली से खाना पकाने (इलेक्ट्रिक कुकिंग) के उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ाने की सलाह दी है।
सप्लाई पर पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) को अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 3 लाख मीट्रिक टन ईंधन अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है।इस बीच, भारत के लिए राहत की खबर भी आई है। भारतीय झंडे वाला दूसरा एलपीजी टैंकर 'नंदा देवी' मंगलवार को गुजरात के वडीनार पोर्ट पहुंच गया।
शिवालिक करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया
एक दिन पहले सोमवार को पहला भारतीय टैंकर 'शिवालिक' भी गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, शिवालिक करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया, जिसमें से 20,000 टन मुंद्रा में उतारा जाएगा और बाकी 26,000 टन मंगलुरु में उतारा जाएगा। ये दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बेहद जोखिम भरे रास्ते को पार करके भारत पहुंचे हैं, जहां ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा है।हालांकि, अभी भी एक और जहाज 'जग लाडकी', जो यूएई से करीब 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है, भारत की ओर रास्ते में है।ऐसे में, होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा हालात के कारण वैश्विक और भारतीय ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने की सलाह
‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलेपमेंट’ (आईआईएसडी) के एक विश्लेषण के अनुसार, यदि शहरी घरों में से 60 प्रतिशत (उच्च-विकास परिदृश्य में) मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाते हैं, तो एलपीजी आयात आधे से अधिक कम हो सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इसे अपनाने के लिए उच्च उपकरण लागत, खान-पान की आदतों में बदलाव और सीमित बिजली आपूर्ति जैसी बाधाओं को दूर करना होगा। एलपीजी आयात पर उच्च निर्भरता का कारण : वर्तमान में भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात करता है। कुल खपत करीब 3.3 करोड़ टन है, जिसमें घरेलू उत्पादन लगभग 1.3 करोड़ टन यानी 40 प्रतिशत है।
लगभग दो-तिहाई एलपीजी जरूरत आयात
आईआईएसडी के नीति सलाहकार सुनील मणि ने समाचार एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, भारत में एलपीजी उत्पादन कच्चे तेल के शोधन और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण से जुड़ा है, जहां यह एक उप-उत्पाद होता है। इसलिए इसका उत्पादन सीमित रहता है और रिफाइनरी कुल उत्पादन का केवल एक से 4.2 प्रतिशत ही एलपीजी के रूप में देती है। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी केवल एलपीजी उत्पादन पर केंद्रित नहीं हो सकती, क्योंकि उसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल बनाना होता है। इसी कारण भारत अपनी लगभग दो-तिहाई एलपीजी जरूरत आयात करता है और चीन के बाद दुनिया के बड़े आयातकों में शामिल है। इससे देश वैश्विक आपूर्ति बाधाओं, भू-राजनीतिक तनाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बन जाता है।


