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चैत्र नवरात्रि 2026: ज्योतिषीय विश्लेषण-पालकी पर आगमन व हाथी पर विदाई, जानें देश-दुनिया पर क्या होगा असर

चैत्र नवरात्र इस वर्ष विशेष संयोग लेकर आया है, जहां मां दुर्गा का आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पालकी पर आगमन समाज में अस्थिरता, रोग और चिंता का संकेत देता है।

Priti Jha
चैत्र नवरात्रि 2026: ज्योतिषीय विश्लेषण-पालकी पर आगमन व हाथी पर विदाई, जानें देश-दुनिया पर क्या होगा असर
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नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र इस वर्ष विशेष संयोग लेकर आया है, जहां मां दुर्गा का आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पालकी पर आगमन समाज में अस्थिरता, रोग और चिंता का संकेत देता है, वहीं हाथी पर प्रस्थान सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और स्थिरता का प्रतीक होता है। यह संयोजन दर्शाता है कि शुरुआती समय में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन अंततः हालात बेहतर होंगे और देश में खुशहाली का वातावरण बनेगा।


देशभर में प्रतिवर्ष दो बार आदिशक्ति मां भवानी के नौ रूपों की विशेष उपासना की जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से चैत्र और शारदीय नवरात्र, दोनों का ही अत्यधिक महत्व है। इस वर्ष 19 मार्च से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो चुका है और श्रद्धापूर्वक देवी के विभिन्न स्वरूपों का पूजन किया जा रहा है। नवरात्रि न केवल हिंदू नव-वर्ष के आगमन का प्रतीक है, बल्कि माता रानी के आगमन की सवारी और विशिष्ट 'वार' (दिन) के अनुसार भविष्य के शुभाशुभ संकेतों का आधार भी है।

सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र पर मां दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह आगामी घटनाओं का पूर्व संकेत देता है। इस बार मां जगदम्बा का आगमन गुरुवार को 'पालकी' पर हुआ है, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को 'गज' (हाथी) पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, देवी का पालकी पर आगमन शुभ नहीं माना जाता; यह प्राकृतिक आपदाओं या अप्रिय घटनाओं का संकेत देता है, जो आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

गुरुवार के दिन आगमन से जोड़कर भी इसे सावधानी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत माना जा रहा है। शास्त्रों की मानें तो यह प्राकृतिक आपदा, उपद्रव, दंगे और जन हानि का संकेत है। वहीं मां हाथी पर सवार होकर शुक्रवार को प्रस्थान करेंगी। मां का हाथी पर आना और जाना दोनों ही शुभ माना जाता है। हाथी स्थिरता और सुख-संपत्ति का संकेत देता है। यह जीवन में सकारात्मता और बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसे में यह साल अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ स्थिरता की संभावना भी रखता है।

साल 2025 में शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था, लेकिन प्रस्थान गुरुवार के दिन भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभता और संतुलन का प्रतीक थे।

बता दें कि वार के हिसाब से मां का प्रस्थान बहुत मायने रखता है। जैसे अगर मां रविवार और सोमवार के दिन प्रस्थान करती है, तो उनकी सवारी भैंसे पर होती है, जो बिल्कुल भी शुभ नहीं होता। भैंसा रोग और शोक का प्रतीक होता है। वहीं अगर मां मंगलवार और शनिवार के दिन प्रस्थान करती है, तो उनकी सवारी मुर्गा होती है, जिसे महामारी और जनहानि का संकेत माना जाता है। अगर मां बुधवार और शुक्रवार के दिन प्रस्थान करती है, तो मां की सवारी हाथी होता है, जो सुख और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही अगर प्रस्थान गुरुवार को होता है, तो मां की सवारी मनुष्य होती है। माना जाता है कि मां अपने भक्त के कंधे पर सवार होकर जाती है। यह भी शुभ माना जाता है।


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