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हरिद्वार का सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर: जहां देवी ने किया था असुरों का वध, आज भी पूरी होती हैं मुरादें

Priti Jha
हरिद्वार का सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर: जहां देवी ने किया था असुरों का वध, आज भी पूरी होती हैं मुरादें
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हरिद्वार। मां चंडी देवी हरिद्वार का एक प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है और यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां दर्शन करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी चंडी ने इसी स्थान पर असुरों का वध किया था। हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु मनसा देवी के दर्शन भी अवश्य करते हैं। दोनों मंदिर शक्ति उपासना के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं और धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं।

देवभूमि उत्तराखंड अपने कण-कण में आध्यात्मिक ऊर्जा समेटे हुए है। इसी पावन धरती पर हरिद्वार धरती धर्म और श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। यहां नील पर्वत की ऊंचाई पर स्थित मां चंडी देवी मंदिर अपनी पौराणिक कहानी और आस्था का प्रतीक है।

मां चंडी देवी मंदिर हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण सिद्धपीठ मानी जाती है। कहा जाता है कि अगर हरिद्वार जाएं, तो चंडी देवी और मनसा देवी के दर्शन करना न भूलें। शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के महत्व और आस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो शेयर किया। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, "धर्मनगरी हरिद्वार में स्थित माँ चंडी देवी मंदिर श्रद्धा, आध्यात्मिकता और दिव्य शांति का अद्भुत संगम है। हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। आप भी हरिद्वार आगमन पर माँ चंडी देवी के दर्शन अवश्य करें।"

यह मंदिर अपनी पौराणिक कथाओं और महत्व के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है, जो देवी चंडी (दुर्गा का रौद्र रूप) को समर्पित है। यहां पर भक्त मां के दर्शन कर मनोकामना मांगते हैं। मंदिर की खास बात यह है कि यहां से गंगा नदी और पूरे हरिद्वार का खूबसूरत नजारा दिखता है। पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देती है। पैदल चढ़ाई करने वाले श्रद्धालु भी इसे एक विशेष अनुभव मानते हैं।

पौराणिक कहानी के अनुसार देवी चंडी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति चंड और मुंड नामक राक्षसों का वध इसी स्थान पर किया था, जिसके बाद वे कुछ समय के लिए यहां रुकी थीं। फिर, कश्मीर के राजा सुचात सिंह को माता के बारे में पता चला था, जिसके बाद उन्होंने 1929 में मंदिर की स्थापना करवाई थी।

हालांकि, कहा जाता है कि मंदिर की मुख्य मूर्ति 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी, जबकि मंदिर की वर्तमान संरचना 1929 में कश्मीर के राजा सुचात सिंह ने बनवाई थी।

मां चंडी देवी मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। चंडी देवी मंदिर को हरिद्वार के तीन प्रमुख सिद्धपीठों (मनसा देवी और माया देवी के साथ) में से एक माना जाता है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और माता के प्रति अपनी आस्था को लेकर दर्शन के लिए आते हैं।


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