नहीं हुआ ईद के चांद के दीदार, केरल को छोड़ पूरे भारत में शनिवार को मनाया जाएगा त्यौहार
गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलग अलग शहरों की चांद समितियों से संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से भी चांद दिखने की पुष्टि नहीं हुई।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। दिल्ली समेत देश के किसी भी हिस्से में बृहस्पतिवार को ईद का चांद नज़र नहीं आया, इसलिए ईद-उल-फित्र का त्यौहार केरल को छोड़कर पूरे देश में शनिवार को मनाया जाएगा तथा शुक्रवार को 30वां और आखिरी रोज़ा होगा। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दिल्ली-एनसीआर के आसमान में बादल छाए हुए थे और यहां चांद नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलग अलग शहरों की चांद समितियों से संपर्क किया गया लेकिन कहीं से भी चांद दिखने की पुष्टि नहीं हुई।
शुक्रवार को 30वां व आखिरी रोज़ा होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘लिहाज़ा फैसला किया गया है कि ईद-उल-फित्र का त्यौहार शनिवार 21 मार्च को मनाया जाएगा और शुक्रवार को 30वां व आखिरी रोज़ा होगा।’’ हालांकि, केरल में यह त्योहार शुक्रवार को मनाया जाएगा। केरल में मौलवियों ने कहा कि शव्वाल का चांद परप्पनंगडी के चेट्टीप्पाडी में देखा गया। वहीं, जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने एक बयान में कहा कि कहीं से ईद का चांद दिखने की खबर नहीं मिली है और शव्वाल (इस्लामी कैलेंडर के 10वें महीने) की पहली तारीख शनिवार को होगी। शव्वाल के महीने के पहले दिन ईद होती है।
लिहाज़ा ईद-उल-फित्र 21 मार्च को होगी
उधर, मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े इमारत ए शरीया हिंद ने भी ऐलान किया है कि बृहस्पतिवार को देश के किसी हिस्से में ईद का चांद नज़र नहीं आया। संगठन ने एक बयान में कहा, ‘‘लिहाज़ा ईद-उल-फित्र 21 मार्च को होगी।’’ अभी इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना ‘रमज़ान’ चल रहा है जिसमें समुदाय के लोग रोज़ा (व्रत) रखते हैं। रमज़ान के महीने में रोज़ेदार सुबह सूरज निकलने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक कुछ खाते-पीते नहीं हैं। यह महीना ईद का चांद नजर आने के साथ खत्म होता है।
नमाज से पहले ‘फित्रा’ (दान) जरूर अदा करें
इस्लामी कलेंडर के मुताबिक, महीना 29 या 30 दिन का होता है जो चांद दिखने पर निर्भर करता है। पिछले साल रमज़ान का महीना 29 दिन का था। अहमद ने कहा कि संपन्न लोगों को ईद की नमाज से पहले ‘फित्रा’ (दान) जरूर अदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवार को फित्रा के तौर पर हर सदस्य के लिए 100 रुपये का दान देना चाहिए।


