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गाजियाबाद में कमर्शियल गैस की किल्लत, जल्द राहत की उम्मीद

गाजियाबाद में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने से रेस्तरां और ढाबा संचालक परेशान हैं। जिला प्रशासन ने सरकार को जिले में दैनिक और मासिक खपत का ब्यौरा भेजा है, जल्द राहत की उम्मीद।

गाजियाबाद में कमर्शियल गैस की किल्लत, जल्द राहत की उम्मीद
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गाजियाबाद, वाईबीएन न्यूज। जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से होटल, रेस्तरां और ढाबा संचालक मुश्किल में आ गए हैं। गैस न मिलने से कारोबार प्रभावित हो रहा है और कई दुकानदारों के सामने रोजी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार भी मामले को गंभीरता से ले रही है। सरकार ने जिला प्रशासन से यह जानकारी मांगी है कि गाजियाबाद में प्रतिदिन और प्रतिमाह कितने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की खपत होती है। प्रशासन ने इस संबंध में आंकड़े तैयार कर शासन को भेज दिए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही जिले में कमर्शियल गैस सिंलेंडर की आपूर्ति बहाल की जा सकती है।

प्रतिष्ठानों का संचालन प्रभावित, रोजगार का संकट

होटल, रेस्तरां और ढाबों में भोजन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। इससे न केवल कारोबार चलता है बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलता है। गैस की आपूर्ति बाधित होने से इन प्रतिष्ठानों के संचालन पर असर पड़ने से रोजगार का संकट स्वभाविक है। जिला प्रशासन ने शासन की मांग पर जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की दैनिक और मासिक खपत का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराया गया है। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही आपूर्ति शुरू करने के लिए फैसला ले सकती है। इसके साथ ही सिलेंडर वितरण को लेकर कुछ नए नियम भी लागू किए जा सकते ह‌ैं।

पीएनजी वाले एलपीजी की लाइन में न लगें

गैस एजेंसियों पर एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल ‌हैं जिनके घरों में पीएनजी कनेक्शन मौजूद है। इससे जरूरतमंद लोगों को गैस मिलने में परेशानी हो रही है। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने अपील की है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी कनेक्शन है, वे एलपीजी सिलेंडर के लिए लाइन में न लगें, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को आसानी से गैस उपलब्ध हो सके।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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