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गोल्डन शॉवर ट्री, जिसके फूलों में छिपा है प्राकृतिक हीलिंग का जादू, जानिए फायदे

इसे गोल्डन शॉवर इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब यह पूरी तरह खिलता है, तो इसकी पीली पुष्प-लड़ियां सुनहरी वर्षा का आभास कराती हैं।

गोल्डन शॉवर ट्री, जिसके फूलों में छिपा है प्राकृतिक हीलिंग का जादू, जानिए फायदे
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स्वर्ण आभा बिखेरता 'गोल्डन शावर ट्री' (कैसिया फिस्टुला) न केवल अपनी लटकते सुनहरे पुष्पों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी औषधीय संपदा के लिए भी पहचाना जाता है। यह मात्र एक सौंदर्यवर्धक वृक्ष नहीं, अपितु आयुर्वेद का एक अनमोल खजाना है। इसके मनभावन पीले फूल न केवल आंखों को भाते हैं, बल्कि तन और मन दोनों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। इसे गोल्डन शॉवर इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब यह पूरी तरह खिलता है, तो इसकी पीली पुष्प-लड़ियां सुनहरी वर्षा का आभास कराती हैं। यह वृक्ष देखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद और घरेलू इलाज में लंबे समय से किया जा रहा है।

फूल और पत्ते कई फाइटोकेमिकल्स से भरपूर

इसके फूल और पत्ते कई फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होते हैं। इनमें कैम्फेरोल, राइन, फाइटोल, फिस्टुलिन, ल्यूकोपेलार्गोनिडिन टेट्रामर और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट शामिल हैं। यही कारण है कि इसके फूलों का इस्तेमाल बुखार घटाने, सूजन कम करने और शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जाता है।अगर त्वचा की देखभाल की बात करें तो इसके फूलों का लेप या इसका अर्क त्वचा को साफ रखने और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करते हैं और त्वचा को जवान बनाए रखने में मदद करते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

गोल्डन शॉवर ट्री के फूलों में मौजूद कैम्फेरोल और राइन जैसे घटक शरीर के अंदर जमा हानिकारक फ्री रेडिकल्स को नष्ट करने में मदद करते हैं। यह न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि कई बीमारियों से लड़ने में भी सहायक है। इसके अलावा, इसके फूलों और छाल का इस्तेमाल कब्ज, पाचन संबंधी समस्याओं और लीवर की सफाई के लिए भी किया जाता है।

इसके इस्तेमाल का तरीका

गोल्डन शॉवर ट्री के औषधीय गुणों का लाभ लेने के लिए इसे सीधे खाने की बजाय इसके अर्क, चूर्ण या लेप के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर होता है। इसका अर्क अक्सर बुखार, त्वचा की सूजन या दाग-धब्बों के इलाज में लगाया जाता है। कुछ लोग इसे हर्बल चाय में मिलाकर भी पीते हैं, जिससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है।औषधीय गुणों से भरपूर होने के बाद भी इसका सेवन बिना किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह के नहीं करना चाहिए, वरना फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।आईएएनएस


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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