अमेरिका बनाम ईरान: वैश्विक ताकतें किस खेमे में, कौन तटस्थ
अमेरिका-ईरान टकराव ने दुनिया को दो खेमों में बांटा, कुछ देश समर्थक, कुछ विरोधी और कई तटस्थ।

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया की कूटनीति उबाल पर है। आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है। इस टकराव ने वैश्विक राजनीति को नए सिरे से दो खेमों में बांट दिया है—एक तरफ अमेरिका-इजरायल के समर्थक, दूसरी तरफ ईरान के साथ खड़े देश, जबकि कुछ राष्ट्र बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपना रहे हैं।
टकराव की पृष्ठभूमि
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में शीर्ष ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किए। यह टकराव सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन का सवाल बन गया है।
कौन किसके साथ?
कीएर स्टार्मर के नेतृत्व में ब्रिटेन ने अमेरिकी अपील मानते हुए अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी। हालांकि, स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन सीधे हमले में शामिल नहीं था और आगे भी आक्रामक कार्रवाई में भाग नहीं लेगा।
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान में ईरान की जवाबी कार्रवाई की आलोचना की और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा का संकल्प जताया।
फ्रांस और जर्मनी
इमैन्युअल मैक्रों और फ़्रीड्रिक मर्त्ज़ ने पश्चिम एशिया में अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। यूरोपीय संघ पहले से ही ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए है।
ऑस्ट्रेलिया के एंथनी अल्बनीज़ ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन किया और कहा कि उनका देश “दमन के खिलाफ लड़ रहे ईरानी लोगों” के साथ है।
खाड़ी देश दे रहे हैं सुरक्षा को तवज्जो
गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) जिसमें यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं, ने ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की।
इन देशों ने आरोप लगाया कि नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। जीसीसी ने बातचीत पर जोर दिया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अपनी सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
ईरान के समर्थन में कौन
पाकिस्तान के शाहबाज़ शरीफ़ ने आयतुल्लाह ख़ामेनेई की मौत पर दुख जताया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन से जोड़ा। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भी हमलों की निंदा की है।
चीन ने हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह ईरान की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है और सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की अपील की।
रूस के व्लादिमीर पुतिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हत्या करार दिया। रूसी विदेश मंत्रालय ने राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
भारत: संतुलन और संयम की नीति
नरेंद्र मोदी ने बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर नागरिकों की सुरक्षा और जल्द संघर्ष विराम पर जोर दिया।
साथ ही उन्होंने शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से भी चर्चा की और यूएई में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए धन्यवाद दिया।
भारत का आधिकारिक रुख साफ है—संयम, संवाद और संप्रभुता का सम्मान। भारत ने किसी पक्ष का खुला समर्थन नहीं किया, बल्कि तनाव कम करने पर जोर दिया।
यूरोपीय संघ का रुख
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की याद दिलाई, लेकिन सभी पक्षों से संयम की अपील भी की। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरानी जनता के साथ एकजुटता जताई, न कि सीधे सरकार के साथ।
रणनीतिक हित – अमेरिका के सहयोगी देश क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु प्रसार रोकने के नाम पर उसके साथ खड़े हैं। ऊर्जा और व्यापार – खाड़ी क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र है; अस्थिरता से पूरी दुनिया प्रभावित होगी।
भूराजनीतिक समीकरण – रूस और चीन, अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने के लिए ईरान के करीब दिख रहे हैं।
घरेलू राजनीति – कई देशों के बयान घरेलू जनमत को ध्यान में रखकर दिए गए हैं।
आगे क्या
मौजूदा हालात में तीन संभावनाएं हैं। सीमित सैन्य टकराव और कूटनीतिक समाधान। क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार। वैश्विक शक्तियों के सीधे हस्तक्षेप से बड़ा संघर्ष
फिलहाल ज्यादातर देश सार्वजनिक तौर पर संयम और संवाद की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके कदम रणनीतिक हितों से तय होंगे।


