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ईरान में 'इकोसाइड': क्या इजराइल नसल को खत्म कर रहा है?

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों ने 'इकोसाइड' का संकट क्यों खड़ा हो गया? ट्रंप क्यों बोले, कि ईरान अब 10 साल पीछे चला गया है? क्या है पूरी रिपोर्ट?

ईरान में इकोसाइड: क्या इजराइल नसल को खत्म कर रहा है?
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । ईरान पर इजराइल और अमेरिका के भारी हमलों ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। बमबारी सिर्फ तेल डिपो और सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रिहायशी इलाकों को भी चपेट में लिया जा रहा है। इससे मासूम जानें जा रही हैं, और साथ ही जहरीले धुएं और दूषित भूजल 'इकोसाइड' का खतरा पैदा कर रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को बीमार बना सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने हाल में जो बयान दिए, वो काफी चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इजराइली हमले अब केवल एक रणनीतिक कदम नहीं रह गए हैं, बल्कि ये 'इकोसाइड' (Ecocide) के तहत आते हैं, यानी पर्यावरण का सामूहिक विनाश। जब मिसाइलें तेल रिफाइनरियों और केमिकल डिपो पर गिरती हैं, तो उससे निकलने वाला जहर हवा में घुलकर हमारे फेफड़ों में पहुंच रहा है।

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या यह विनाश अनजाने में हो रहा है या इसके पीछे कोई खतरनाक साजिश छुपी है? जानकारों का मानना है कि मिट्टी और पानी का यह जहर ईरान की आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।

खर्ग आइलैंड की तबाही: '5 मिनट का नोटिस और सब खत्म'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। जॉइंट बेस एंड्रूज़ जाते समय उन्होंने कहा कि ईरान का खर्ग आइलैंड (Kharg Island), जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लगभग नष्ट हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी, "वहां बस एक छोटा सा हिस्सा बचा है जहाँ पाइपलाइनें हैं, और हम उसे केवल 5 मिनट के नोटिस पर उड़ा सकते हैं।"

यह हमला केवल आर्थिक नुकसान नहीं है। तेल के कुओं और पाइपलाइनों में लगी आग से निकलने वाला कार्बन और जहरीले तत्व ईरान की धरती को बंजर बना रहे हैं।

10 साल पीछे धकेला गया ईरान

ट्रंप का कहना है कि इन हमलों ने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को इतना नुकसान पहुंचाया है कि उसे फिर से खड़ा होने में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।

सैन्य ढांचे का विनाश: अधिकांश रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ध्वस्त हो गए हैं।

आर्थिक कमर टूटी: तेल निर्यात के प्रमुख केंद्र मलबे में बदल गए हैं।

नागरिक बुनियादी ढांचा: स्कूल, अस्पताल और रिहायशी इमारतें भी प्रभावित हुई हैं।

"अगर हम अभी पीछे हट भी जाएं, तो ईरान को संभलने में 10 साल लगेंगे। वे पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं।" - डोनाल्ड ट्रंप

क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और युद्ध अपराध का उल्लंघन है?

जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, नागरिक संपत्तियों और पर्यावरण को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना युद्ध अपराध माना जाता है। ईरान के शहरों से आ रही तस्वीरों में काली लपटों और जहरीले धुएं का साफ नजारा है। एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह हमला सिर्फ वहां के राजनीतिक ढांचे पर नहीं, बल्कि वहां की मिट्टी और पानी पर है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता है।

मिट्टी और भूजल का दूषित होना आने वाले सालों में ईरान में कैंसर, जन्मजात बीमारियों और कृषि की बर्बादी का संकट बढ़ा सकता है।

ईरान और इजराइल के बीच का यह संघर्ष अब केवल सीमाओं का मामला नहीं रह गया है। यह अब संसाधनों और जीवन के आधार को खत्म करने की लड़ाई बन चुकी है। अगर दुनिया ने समय रहते इस 'इकोसाइड' का संज्ञान नहीं लिया, तो मध्य पूर्व का एक बड़ा हिस्सा रहने के लिए अनुपयुक्त हो जाएगा।


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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