मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा में तैनात NOPO कितनी खतरनाक है...क्या रोक पाएगी अमेरिका-इजरायल के मंसूबे?
ईरान में काउंटर टेररिज्म स्पेशल फोर्स की केवल 6 ब्रिगेड हैं। फिर भी यह IRGC से कहीं अधिक खतरनाक, बेरहम और तेज तर्रार मानी जाती है। जानते हैं क्यों?

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। 28 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक और घातक संयुक्त ऑपरेशन में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अब ईरान की कमान उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) के हाथों में है, लेकिन सत्ता संभालने के साथ ही मोजतबा के सिर पर भी मौत का साया मंडराने लगा है। अमेरिका और इजरायल ने अब नए सुप्रीम लीडर को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। इस भीषण खतरे को देखते हुए मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा का जिम्मा ईरान की सबसे क्रूर और रहस्यमयी यूनिट NOPO (Counter-Terrorism Special Force) को सौंपा गया है।
कौन हैं NOPO : ईरान की ब्लैक-क्लैड फोर्स?
फॉक्स न्यूज और नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) के दावों के अनुसार मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा अब NOPO के अभेद्य घेरे में है। इस बल को ब्लैक-क्लैड यानी काले कपड़ों वाली सेना कहा जाता है।
NOPO का इतिहास और ताकत
गठन : इस बल का गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के तुरंत बाद किया गया था। फारसी में इसका पूरा नाम निरौयेह विजेह पासदारन वेलायत है। इसका मतलब है-सुप्रीम लीडर की रक्षा के लिए विशेष बल।
IRGC से अलग पहचान : आमतौर पर दुनिया ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को सबसे ताकतवर मानती है, लेकिन NOPO उससे कहीं अधिक विशिष्ट है। जहां IRGC एक सैन्य शाखा है, वहीं NOPO का मुख्य काम सर्वोच्च नेता की व्यक्तिगत सुरक्षा, बंधक संकट को सुलझाना और आंतरिक विद्रोहों को कुचलना है।
क्रूरता का पर्याय : 1999 के छात्र आंदोलनों और 2019 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों को जिस बेरहमी से दबाया गया, उसके पीछे NOPO का ही हाथ था। मानवाधिकार संगठनों ने इस फोर्स पर अत्यधिक क्रूरता के आरोप लगाए हैं।
तैनाती : पूरे ईरान में इसकी केवल 6 ब्रिगेड हैं-4 तेहरान में, 1 मशहद में और 1 इस्फान में। ये जवान इतने प्रशिक्षित हैं कि इन्हें IRGC से भी अधिक घातक माना जाता है। मोजतबा के सुरक्षा घेरे में IRGC और पुलिस बाहरी लेयर पर होती है, लेकिन सबसे भीतरी और विश्वसनीय घेरा NOPO का ही होता है।
दुनिया के अन्य शक्तिशाली मुस्लिम देशों के सुप्रीमो की सुरक्षा एजेंसियां
ईरान की NOPO की तरह ही अन्य मुस्लिम देशों के शासकों की सुरक्षा के लिए भी दुनिया की सबसे खतरनाक और पेशेवर एजेंसियां तैनात रहती हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में:
1. सऊदी अरब : रॉयल गार्ड रेजिमेंट (Saudi Royal Guard)
सऊदी अरब के किंग और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा का जिम्मा सऊदी रॉयल गार्ड रेजिमेंट के पास है।
कितनी खतरनाक : यह सेना सऊदी अरब की नियमित सेना से पूरी तरह अलग और स्वतंत्र है। इनके पास अपने खुद के टैंक, हेलीकॉप्टर और आधुनिक हथियार होते हैं।
खासियत : इनका चयन अत्यंत कठिन होता है और ये सीधे किंग के प्रति वफादार होते हैं। ये न केवल फिजिकल सिक्योरिटी देते हैं, बल्कि इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा में भी माहिर होते हैं।
2. तुर्की : प्रसिडेंशियल गार्ड और CAT (Presidential Guard Unit)
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सुरक्षा CAT (Counter Attack Team) नामक एक विशेष यूनिट करती है।
कितनी खतरनाक : 2016 के तख्तापलट के प्रयास के बाद एर्दोगन ने अपनी सुरक्षा को कई गुना बढ़ा दिया है। 'CAT' के जवान स्नाइपर शूटिंग और क्लोज कॉम्बैट में दुनिया के बेहतरीन लड़ाकों में गिने जाते हैं। ये राष्ट्रपति के काफिले के साथ हमेशा साये की तरह चलते हैं और किसी भी हमले का जवाब सेकंडों में देने में सक्षम हैं।
3. जॉर्डन : स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOCOM)
जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय खुद एक प्रशिक्षित पायलट और कमांडो हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा जॉर्डन स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के पास है।
कितनी खतरनाक : इसे मध्य पूर्व की सबसे प्रशिक्षित स्पेशल फोर्स माना जाता है। अमेरिकी नेवी सील्स और ब्रिटिश SAS के साथ ये नियमित युद्धाभ्यास करते हैं। इनका नेटवर्क इतना तगड़ा है कि ये परिंदे को भी किंग के पास पर मारने की इजाजत नहीं देते।
4. पाकिस्तान : स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा Special Service Group (SSG) के चुनिंदा कमांडो करते हैं।
कितनी खतरनाक : इन्हें ब्लैक स्टॉर्क भी कहा जाता है। ये दुनिया की टॉप-10 स्पेशल फोर्सेज में शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों और शहरी युद्ध में ये बेहद माहिर होते हैं। हालांकि, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के कारण इनका झुकाव अक्सर सैन्य नेतृत्व की ओर ज्यादा रहता है।
क्या मोजतबा खामेनेई बच पाएंगे?
ईरान के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान की साख दांव पर है। मोजतबा खामेनेई ने NOPO को अपना कवच बनाकर यह संदेश दिया है कि वे किसी भी आंतरिक विद्रोह या बाहरी हमले को कुचलने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल जिस तरह की आधुनिक तकनीक और प्रिसिजन स्ट्राइक का उपयोग कर रहे, उसमें केवल शारीरिक सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। NOPO के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ड्रोन हमलों से नए सुप्रीम लीडर को बचाने की होगी। ईरान का भविष्य अब इस बात पर निर्भर है कि यह ब्लैक-क्लैड फोर्स मोजतबा खामेनेई को कितनी मजबूती से बचा पाती है, क्योंकि अमेरिका-इजरायल की नजरें अब मोजतबा के सुरक्षा घेरे की हर एक कमजोरी पर टिकी हैं।


