Top
Begin typing your search above and press return to search.

ईरान की 'पाताल' वाली लैब: 5000 फीट नीचे महाविनाश की तैयारी?

ईरान के पिकएक्स माउंटेन के नीचे 329 फीट गहरे बंकरों में परमाणु बम बनाने की तैयारी ने अमेरिका को क्यों डरा दिया? कैसे पश्चिम एशिया में महायुद्ध का खतरा और बढ़ा?

ईरान की पाताल वाली लैब: 5000 फीट नीचे महाविनाश की तैयारी?
X

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । ईरान के पिकएक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) के नीचे एक रहस्यमयी दुनिया ने पेंटागन को परेशान कर रखा है। कहा जा रहा है कि इस 5000 फीट ऊंचे पहाड़ के भीतर 329 फीट गहरी सुरंगों में ईरान अपना परमाणु बम बना रहा है, जिसे किसी भी बंकर-बस्टर बम का सामना नहीं कर सकता।

पश्चिम एशिया की धरती इन दिनों मिसाइलों के धमाकों से गूंज रही है। आसमान आत्मघाती ड्रोन से भरा हुआ है और समुद्र में अमेरिकी जंगी जहाजों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लेकिन इस हलचल के बीच एक ऐसी खामोशी है, जिसने इजराइल से लेकर वॉशिंगटन तक बेचैनी फैला दी है। यह खामोशी ईरान के 'पिकएक्स माउंटेन' की है, जिसके अंदर ईरान ने अपने सबसे बड़े डेथ-वारंट (परमाणु प्रोजेक्ट) को तैयार कर लिया है।

हालिया अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप और पेंटागन के अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है। खबर है कि ईरान ने अपने सैकड़ों किलो संवर्धित यूरेनियम को नतांज जैसी पुरानी साइट्स से हटा कर इस पहाड़ी के नीचे शिफ्ट कर दिया है।

क्या है पिकएक्स माउंटेन का रहस्य?

दूर से देखने पर यह पहाड़ एक बंजर चट्टान जैसा लगता है, लेकिन इसकी असली कहानी इसके भूगोल में है। 5000 फीट ऊंचा यह पहाड़ एक प्राकृतिक किले की तरह काम करता है। इसकी आकृति इतनी जटिल है कि आधुनिक सैटेलाइट्स और ड्रोन भी इसके अंदर की गतिविधियों को ठीक से नहीं पकड़ पाते।

ईरान ने इसको ध्यान में रखते हुए पहाड़ के नीचे सुरंगों का ऐसा जाल बिछाया है, जो किसी भूलभुलैया से कम नहीं है। जानकारों का कहना है कि यह जगह केवल एक स्टोरेज नहीं, बल्कि एक पूरी तरह कार्यात्मक परमाणु प्रयोगशाला बन चुकी है।

बड़ी बात: ईरान ने करीब 400 किलो संवर्धित यूरेनियम 329 फीट की गहराई में बने बंकरों में छिपा दिया है। ये बंकर इतनी गहराई में हैं कि अमेरिका का सबसे शक्तिशाली 'बंकर-बस्टर' बम भी वहां तक पहुंचते-पहुँचते दम तोड़ देगा।

क्यों बेअसर हो सकते हैं अमेरिकी हमले?

पेंटागन की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आज जंग होती है, तो क्या वे इस परमाणु साइट को नष्ट कर पाएंगे? पहले अमेरिका ने इस्फहान और फोर्दो प्लांट पर हमले की योजना बनाई थी, लेकिन पिकएक्स माउंटेन का मामला कुछ और है।

पहाड़ी कवच: 300 फीट की कंक्रीट और प्राकृतिक चट्टान की परतें किसी भी हवाई हमले का सामना करने में सक्षम हैं।

सैन्य घेराबंदी: पहाड़ के चारों ओर ईरान की उच्च प्रशिक्षित सेना की तैनाती है, जिससे कोई भी परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

स्पेशल फोर्स का खतरा: अगर अमेरिका जमीनी ऑपरेशन की सोचता है, तो उसे ईरान की भूमि पर उतरना होगा, जो एक बड़े युद्ध को आमंत्रित करने जैसा होगा।

90% की दहलीज पर खड़ा ईरान?

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी की चेतावनी ने स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। उनके मुताबिक, ईरान ने अपने यूरेनियम को 60% तक संवर्धित कर लिया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, परमाणु बम बनाने के लिए 90% शुद्धता की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि ईरान अब अपने लक्ष्य के बेहद करीब है।

ट्रंप प्रशासन को चिंता है कि अगर ईरान परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया, तो मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश भी अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल हो सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया एक 'न्यूक्लियर ज्वालामुखी' के मुहाने पर खड़ी हो जाएगी।

इजराइल और अमेरिका के पास क्या विकल्प हैं?

इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू कई बार कह चुके हैं कि वे ईरान को 'परमाणु क्लब' में शामिल नहीं होने देंगे। लेकिन सवाल फिर वही है—कैसे?

साइबर अटैक: क्या कोई नया वायरस जैसे स्टक्सनेट ईरान के सेंट्रीफ्यूज को खराब कर सकता है?

गुप्त ऑपरेशन: क्या मोसाद के एजेंट इस परियोजना को नाकाम करने के लिए पहाड़ के अंदर घुस सकेंगे?

सीधा सैन्य हमला: क्या ट्रंप प्रशासन एक ऐसा जोखिम उठाएगा जिससे दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ जाए?

पिकएक्स माउंटेन इस समय एक पहेली बना हुआ है। इसके नीचे जो गतिविधियां चल रही हैं, वो या तो ईरान की सुरक्षा की ढाल बनेंगी या फिर पूरे विश्व के लिए विनाश का कारण। फिलहाल, वॉशिंगटन के वॉर-रूम में इस 'खामोश पहाड़' की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है।


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire