Saudi Arabia का बदला रुख, US पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का दबाव
व्हाइट हाउस की बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री ने ट्रंप प्रशासन को दी सख्त चेतावनी, सार्वजनिक संयम के उलट ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के पक्ष में रियाद

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क: ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक बड़ा और अहम मोड़ सामने आया है। पर्दे के पीछे सऊदी अरब ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने वॉशिंगटन में एक निजी ब्रीफिंग के दौरान अमेरिका से ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है।
ट्रंप ईरान के खिलाफ पहले दी गई धमकियों पर अमल नहीं करते हैं
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रिंस खालिद ने कहा कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ पहले दी गई धमकियों पर अमल नहीं करते हैं, तो इससे ईरानी शासन और अधिक मजबूत होकर उभरेगा। उनका मानना है कि अमेरिकी दबाव से पीछे हटने का संदेश तेहरान को यह भरोसा देगा कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद बच सकता है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, यह अहम ब्रीफिंग व्हाइट हाउस में हुई, जिसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन मौजूद थे। बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके क्षेत्रीय प्रभावों पर केंद्रित था।
मेरिका ने ईरान पर हमले के फैसले को टाल दिया था
सऊदी अरब का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के हफ्तों में सार्वजनिक तौर पर रियाद लगातार संयम और कूटनीतिक समाधान की बात करता रहा है। करीब तीन हफ्ते पहले ही सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राष्ट्रपति ट्रंप से क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले के फैसले को टाल दिया था। हालांकि अब सऊदी नेतृत्व के भीतर सोच में बदलाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इससे पहले मोहम्मद बिन सलमान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए सऊदी अरब के एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रतिबंध सबसे पहले अप्रैल 2025 में लगाया गया था, जब अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। उस समय अमेरिका को अपने अन्य सैन्य ठिकानों और एयरबेस का सहारा लेना पड़ा था।
खाड़ी देशों ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल से रोक रखा है
अब जबकि ईरान में सत्ता परिवर्तन को लक्ष्य बनाकर हमले की योजना पर विचार हो रहा है, तब भी सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देशों ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल से रोक रखा है। इसके बावजूद सऊदी नेतृत्व के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रिंस खालिद ने बंद कमरे की बैठकों में यह भी कहा कि यदि अमेरिका इस स्तर पर पीछे हटता है, तो इससे ईरान को यह संकेत मिलेगा कि वह दबाव के बावजूद सुरक्षित रह सकता है। इससे तेहरान का हौसला बढ़ेगा और वह पूरे क्षेत्र में और अधिक आक्रामक नीति अपना सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव भड़कने का गंभीर खतरा बना रहेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया है
फिलहाल अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, लेकिन व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया है और कूटनीतिक विकल्प खुले हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की ठोस या सीधी बातचीत फिलहाल नहीं चल रही है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान मौजूदा अमेरिकी शर्तों पर किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि ईरान को लेकर सऊदी अरब की रणनीति अब सार्वजनिक बयानों से अलग, कहीं ज्यादा सख्त और व्यावहारिक होती जा रही है। इससे आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया, यानी मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

