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781 साल तक चला एक युद्ध, पीढ़ियां जन्मीं और मर गईं, जंग जारी रही

मिडिल ईस्ट के हालात और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। आइए जानते हैं इतिहास के सबसे लंबे युद्ध के बारे में।

Kumar
781 साल तक चला एक युद्ध, पीढ़ियां जन्मीं और मर गईं, जंग जारी रही
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वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।

मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग आज पूरी दुनिया को बेचैन किए हुए है। हर दिन नए हमले, नई तबाही और नई चिंताएँ। लेकिन इस सबके बीच एक सवाल सबके ज़हन में है — यह जंग आखिर कब खत्म होगी? इतिहास कहता है कि यह सवाल जितना आसान लगता है, इसका जवाब उतना ही मुश्किल है। युद्ध की शुरुआत की तारीख तो तय होती है, लेकिन उसके खत्म होने का वक्त कोई नहीं जानता। और इतिहास के पन्ने पलटें तो कुछ ऐसी जंगें मिलती हैं जो पीढ़ियों तक चलती रहीं — सदियों तक।

जंग पूरी सभ्यता को निगल गई

मानव इतिहास का सबसे लंबा सैन्य संघर्ष अगर किसी एक युद्ध को कहा जाए, तो वह है रिकोंक्विस्टा। यह लड़ाई 711 ईस्वी में शुरू हुई और 1492 ईस्वी में जाकर खत्म हुई — यानी पूरे 781 साल। सोचिए, जब यह युद्ध शुरू हुआ तब जो बच्चे पैदा हुए, उनकी न सिर्फ पूरी ज़िंदगी गुज़र गई, बल्कि उनकी कई पीढ़ियाँ जन्मीं, जिंदगी जीं और दफन हो गईं — और जंग फिर भी जारी रही।

यह युद्ध इबेरियन प्रायद्वीप पर लड़ा गया था, जो आज के स्पेन और पुर्तगाल का इलाका है। आठवीं सदी में मुस्लिम सेनाओं ने, जिन्हें 'मूर्स' कहा जाता था, इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इसके जवाब में ईसाई राज्यों ने अपनी खोई हुई ज़मीनें वापस पाने के लिए एक लंबा और थकाने वाला संघर्ष शुरू किया। कैस्टिले और एरागॉन जैसे राज्यों ने धीरे-धीरे, सदी-दर-सदी मूर्स को पीछे धकेला। यह महायुद्ध तब जाकर समाप्त हुआ जब 1492 में ग्रेनेडा का पतन हुआ और वहाँ फिर से ईसाई शासन कायम हो गया।

681 साल की दुश्मनी — दो साम्राज्यों ने एक-दूसरे को खोखला कर दिया

रिकोंक्विस्टा के बाद इतिहास का दूसरा सबसे लंबा संघर्ष रोमन-फारसी युद्ध है, जो लगभग 681 सालों तक चला — 54 ईसा पूर्व से 628 ईस्वी तक। यह प्राचीन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों — रोमन साम्राज्य और फारसी साम्राज्य — के बीच की वह खूनी दुश्मनी थी जो सदियों तक थमी नहीं।

मिडल ईस्ट और कॉकेशस के इलाकों पर वर्चस्व के लिए दोनों साम्राज्यों की सीमाएँ बार-बार बदलती रहीं। हमले होते, जवाबी हमले होते, संधियाँ टूटतीं और फिर जंग छिड़ जाती। इतिहासकार इसे दुनिया की सबसे लंबी भूराजनीतिक दुश्मनी मानते हैं। और इसका अंजाम क्या हुआ? दोनों साम्राज्य इतने कमज़ोर हो गए कि अरब सेनाओं के उदय का रास्ता खुद-ब-खुद साफ हो गया। जो दो ताकतें सदियों तक एक-दूसरे से लड़ती रहीं, वे दोनों इतिहास के अँधेरे में खो गईं।

214 साल — और एक शहर के पतन ने बदल दिया पूरा युग

ओटोमन-बाइजेंटाइन युद्ध 1265 से 1479 के बीच करीब 214 सालों तक चला। यह वह दौर था जब बाइजेंटाइन साम्राज्य की ताकत घट रही थी और ओटोमन तुर्कों का सितारा बुलंद हो रहा था। इस लंबे टकराव में ओटोमन साम्राज्य ने अनातोलिया और बाल्कन पर अपनी पकड़ मज़बूत की। लेकिन इस पूरे युद्ध का सबसे निर्णायक पल 1453 में आया जब कॉन्सटेंटिनोपल — यानी कुस्तुनतुनिया — का पतन हुआ। इस एक घटना ने न सिर्फ बाइजेंटाइन साम्राज्य को मिटा दिया, बल्कि मध्यकाल के अंत और आधुनिक युग की शुरुआत का एलान भी कर दिया।

116 साल — और एक लड़की ने पलट दिया युद्ध का पासा

इंग्लैंड और फ्रांस के बीच 1337 से 1453 तक लड़ा गया सौ साल का युद्ध — जो असल में 116 साल चला — इतिहास के सबसे मशहूर संघर्षों में से एक है। फ्रांसीसी राजगद्दी और ज़मीन के लिए शुरू हुई यह जंग कई बार थमी, शांति के दौर आए, गठबंधन बदले — लेकिन जंग खत्म नहीं हुई। इसी युद्ध के बीच से जोन ऑफ आर्क का उदय हुआ — एक साधारण लड़की, जिसने फ्रांसीसी सेना में ऐसा जोश भरा कि युद्ध का रुख पलट गया। अंततः फ्रांस ने अंग्रेज़ी सेनाओं को अपनी धरती से खदेड़ कर जीत हासिल की। इतिहास के ये युद्ध आज की जंगों को एक आईना दिखाते हैं। मिडल ईस्ट में जो आग आज धधक रही है, वह कब बुझेगी — यह कोई नहीं जानता।


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