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Mujtaba Khamenei: मौत की अफवाह या रूस में पनाह? अमेरिका बेबस क्यों?

क्या ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई गायब हो गए हैं? ट्रंप ने मौत का इशारा क्यों किया? कुवैती मीडिया रूस में होने की बात क्यों कही। जानें अंडरग्राउंड थ्योरी का सच।

Mujtaba Khamenei: मौत की अफवाह या रूस में पनाह? अमेरिका बेबस क्यों?
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति के 10 दिन बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला है। डोनाल्ड ट्रंप के 'मौत' वाले दावे और कुवैती मीडिया की 'रूस' वाली थ्योरी ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। क्या मुज्तबा वाकई सुरक्षित हैं?

ईरान की सत्ता में आए महज 10 दिन हुए हैं, और मुज्तबा खामेनेई एक पहेली बन चुके हैं, जिसे सुलझाने में सीआईए और मोसाद जैसे ताकतवर खुफिया संगठनों को पसीना आ रहा है। 8 मार्च को जब उन्होंने आधिकारिक तौर पर कमान संभाली, तब से उनका 'गायब' होना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक खेल का हिस्सा लगता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके मारे जाने की आशंका जता रहे हैं, वहीं रूस से आ रही खबरें पूरी तरह अलग कहानी पेश कर रही हैं। आखिर वो बंकर क्या है, जिसे अमेरिका भेद नहीं पा रहा?

ट्रंप का सनसनीखेज दावा: क्या मुज्तबा अब नहीं रहे?

जब मुज्तबा को पद संभाले अभी केवल आठ दिन हुए थे, तभी व्हाइट हाउस से एक बयान ने हलचल मचा दी। ट्रंप ने हाल ही में मुज्तबा खामेनेई के बारे में चल रही अफवाहों का जिक्र करते हुए कहा, "हो सकता है कि मुज्तबा अब इस दुनिया में न हों।" उनका यह इशारा उस इजरायली एयरस्ट्राइक की ओर था, जो 9 मार्च को ईरान के एक गुप्त ठिकाने पर की गई थी। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) का मानना है कि उस हमले में मुज्तबा गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन दावों को नकारते हुए कहा कि उनके नेता पूरी तरह स्वस्थ हैं और देश के बड़े फैसले ले रहे हैं।

'ऑपरेशन मॉस्को': क्या पुतिन की गोद में हैं ईरान के नए रहबर?

मुज्तबा के गायब होने की गुत्थी में दूसरा बड़ा मोड़ कुवैती अखबार 'अल-जरीदा' की रिपोर्ट है। इसके अनुसार, मुज्तबा खामेनेई ईरान में नहीं हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायली हमले में घायल होने के बाद उन्हें एक रूसी मिलिट्री प्लेन के जरिए गुपचुप तरीके से मॉस्को ले जाया गया है।

दावा: मुज्तबा के पैर में फ्रैक्चर है और वे रूस के एक हाई-टेक मिलिट्री अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

रूसी कनेक्शन: रूस और ईरान के रक्षा संबंध बड़े गहरे हैं। यूक्रेन युद्ध में ईरानी ड्रोन्स की मदद के बदले पुतिन ने शायद मुज्ता के लिए 'सुरक्षित आवास' की व्यवस्था की है।

खामोशी: सबसे दिलचस्प यह है कि रूस ने इस खबर का खंडन नहीं किया, जिससे संदेह और गहरा गया है।

क्यों अमेरिका के लिए 'अदृश्य' हो गए हैं मुज्ता?

सीनियर खामेनेई (अयातुल्ला अली खामेनेई) को ट्रैक करना अमेरिका के लिए आसान था। वो सार्वजनिक सभाएं करते थे, मस्जिदों में जाते थे और उनकी दिनचर्या पब्लिक डोमेन में होती थी। पर मुज्तबा की स्थिति एकदम उलट है।

1. सूचनाओं का अकाल: मुज्तबा खामेनेई की निजी जिंदगी, उनके करीबी सलाहकारों और उनकी गतिविधियों के बारे में अमेरिका के पास 'जीरो' इंटेलिजेंस है। वो साये की तरह काम कर रहे हैं। शायद यही कारण है कि अमेरिकी सेंटकॉम ने उन पर बड़ा इनाम घोषित किया है।

2. बंकर और डिजिटल ब्लैकआउट: ईरानी गार्जियन काउंसिल ने मुज्तबा को नियुक्त करने से पहले उनके लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया था। वो किस फोन का इस्तेमाल करते हैं, किस सिग्नल का, ये आज भी CIA के लिए रहस्य है।

इजरायल की वो स्ट्राइक और 4 दिन पहले का दावा

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का ट्रैक रिकॉर्ड है कि वो अपने दुश्मनों को पाताल से भी खोज निकालते हैं। 9 मार्च की उस स्ट्राइक के बाद IDF ने कहा था कि मुज्ता को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया है। मुज्ता का अचानक गायब होना इस दावे की पुष्टि करता है कि वो या तो शारीरिक रूप से असमर्थ हो चुके हैं या फिर अपनी जान बचाने के लिए ईरान की सीमा पार कर चुके हैं।

अमेरिका की कोशिश साफ है—वह मुज्ता को सीनियर खामेनेई की तरह रास्ते से हटाना चाहता है ताकि ईरान के नेतृत्व को पूरी तरह कमजोर किया जा सके। लेकिन मुज्ता ने 'अदृश्य' रहकर अमेरिका की इस योजना को विफल कर दिया है।

ईरान के अंदर भी अब सवाल उठने लगे हैं। अगर मुज्ता सुरक्षित हैं, तो क्या वो जल्दी ही किसी वीडियो संदेश के जरिए दुनिया के सामने आएंगे? या फिर मिडिल ईस्ट में एक और बड़े युद्ध की आहट के बीच रूस और ईरान मिलकर कोई बड़ा 'सरप्राइज' प्लान कर रहे हैं?


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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