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ईरान युद्ध में अमेरिका को घसीटने पर बोले नेतन्याहू, कोई ट्रंप को बता सकता है क्या करना है?'

अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को स्थिर करने और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को रोकने के लिए एक मुख्य उपाय के तौर पर ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है।

ईरान युद्ध में अमेरिका को घसीटने पर बोले नेतन्याहू, कोई ट्रंप को बता सकता है क्या करना है?
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US President Donald Trump and Israeli PM Benjamin Netanyahu Photograph: (file Picture)

तेलअवीव/वाशिंगटन, वाईबीएन डेस्क। ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका के युद्ध में शामिल करने के आरोपों का जवाब देते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि 'क्या कोई सच में सोचता है कि कोई ट्रंप को बता सकता है कि क्या करना है?' नेतन्याहू ने शुक्रवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि उनके देश ने अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध में घसीटा है। उन्होंने इन रिपोर्ट्स को 'पूरी तरह फेक न्यूज' बताया। उन्होंने कहा कि 20 दिनों की लड़ाई के बाद ईरान अब न तो बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता रखता है और न ही यूरेनियम समृद्ध करने की। उधर, खबर है कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को स्थिर करने और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को रोकने के लिए एक मुख्य उपाय के तौर पर ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है।

अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोप खारिज

शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में इजरायली पीएम ने साफतौर पर कहा कि यह कहना गलत है कि इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस युद्ध में शामिल किया। नेतन्याहू ने बताया कि ट्रंप ने उनसे ईरान के गैस फील्ड पर आगे के हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने साफ किया कि ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला इजरायल ने अकेले किया। नेतन्याहू ने कहा, इस ऑपरेशन में किसी और देश की भूमिका नहीं थी. नेतन्याहू ने भरोसा जताया कि यह युद्ध लोगों की उम्मीद से जल्दी खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की धमकी बेअसर

ईरान की स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को बंद करने की धमकी पर इजरायली पीएम ने कहा कि यह 'ब्लैकमेल' काम नहीं करेगा और दुनिया इसके लिए तैयार है। नेतन्याहू ने कहा कि तेल और गैस के लिए होर्मुज और रेड सी जैसे रास्तों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने अरब प्रायद्वीप के रास्ते पाइपलाइन बनाकर इजरायल और भूमध्यसागर तक ऊर्जा पहुंचाने की बात कही। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के नेतृत्व में दरारें दिख रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वहां सत्ता को लेकर अंदरूनी तनाव है और नया नेतृत्व अभी खुलकर सामने नहीं आया है.

ईरान की हालत कमजोर होने का दावा

उन्होंने दावा किया कि 20 दिनों की लड़ाई में ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन करने की क्षमता नहीं है और न ही उसके पास बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता है।वहीं, नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ अपने तालमेल की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच बेहतरीन समन्वय है. उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु खतरे को लेकर ट्रंप पहले से ही पूरी तरह समझ रखा है।

ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार

अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को स्थिर करने और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को रोकने के लिए एक मुख्य उपाय के तौर पर ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस रणनीतिक बदलाव की पुष्टि करते हुए इसे आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए संघीय सरकार के भीतर एक व्यापक "समन्वित प्रयास" का हिस्सा बताया। फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए, बेसेंट ने खुलासा किया कि प्रशासन ने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी तत्काल चिंताओं को दूर करने के लिए ट्रेजरी और कार्यकारी शाखा में एक "ब्रेक द ग्लास प्लान" लागू किया है।

बेसेंट ने संकेत दिया कि जैसे-जैसे मौजूदा अभियान आगे बढ़ रहा है, अमेरिका ईरानी तेल की स्थिति का मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में, हम उस ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा सकते हैं जो इस समय समुद्र में है। यह लगभग 140 मिलियन बैरल है। उन्होंने समझाया कि यह मात्रा मोटे तौर पर "10 दिनों से 2 सप्ताह की आपूर्ति" के बराबर है, जिसे ईरानी बाहर भेज रहे थे और जो पूरी तरह से चीन को जाने वाला था।

बेसेंट ने इन फैसलों के पीछे के रणनीतिक तर्क का विस्तार से वर्णन किया, और प्रतिबंधित भंडारों के उपयोग को उन शासनों के खिलाफ एक हथियार के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ से यह तेल आता है। बेसेंट ने टिप्पणी की, "संक्षेप में, हम इस अभियान को जारी रखते हुए, अगले 10 या 14 दिनों तक कीमतों को कम रखने के लिए ईरानियों के खिलाफ ही ईरानी तेल का इस्तेमाल करेंगे।"


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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