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ट्रंप की मुश्किलें बढ़ीं: 50,000 एपस्टीन फाइल्स खोलेंगी राज़?

क्या युद्ध के बीच ट्रंप पर 'एपस्टीन बम' फूटा? क्या 50,000 गोपनीय फाइलें होंगी सार्वजनिक? क्या गायब दस्तावेजों में छिपा है डोनाल्ड ट्रंप का कोई बड़ा राज?

ट्रंप की मुश्किलें बढ़ीं: 50,000 एपस्टीन फाइल्स खोलेंगी राज़?
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग 50,000 गोपनीय एपस्टीन फाइल्स सार्वजनिक करने की तैयारी कर रहा है, जो कि पहले 'लापता' मानी जा रही थीं। वहीं, अटॉर्नी जनरल पॉम बोन्डी की गवाही ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

एक ओर, डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात को संभालने में लगे हैं, दूसरी ओर, वाशिंगटन से ऐसी खबरें आई हैं जो उनकी नींद उड़ा सकती हैं। राजनीति में एक कहावत है कि 'इतिहास कभी पीछा नहीं छोड़ता', और ट्रंप के मामले में जेफरी एपस्टीन का काला अतीत फिर से सामने आ रहा है।

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने एक फैसला लिया है जिससे ना सिर्फ व्हाइट हाउस, बल्कि कई प्रभावशाली लोगों के माथे पर पसीना बढ़ गया है। 50,000 वे दस्तावेज, जो पहले फाइलों के ढेर में दबे थे, अब सामने आने ही वाले हैं।आगे क्या होगा? क्या इनमें वाकई ट्रंप का नाम होगा? चलिए विस्तार से समझते हैं।

50,000 फाइल्स का धमाका: क्यों कांप रहे हैं ताकतवर लोग?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, न्याय विभाग के पास जेफरी एपस्टीन से जुड़े कुल 6 लाख दस्तावेज हैं। इनमें से अब तक सिर्फ 3 लाख ही सार्वजनिक किए गए थे। बाकी के 3 लाख फाइलों पर कानूनी पेच फंसा था। लेकिन अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों के भारी दबाव के बाद, अब विभाग ने करीब 50,000 'लापता' दस्तावेजों को जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गायब फाइलों का रहस्य: इन 50 हजार पन्नों को लेकर यह दावा किया जा रहा था कि ये गुम हो चुके हैं।

अगले हफ्ते का डेडलाइन: उम्मीद है कि यह जल्द ही पब्लिक डोमेन में होंगी।

ट्रंप कनेक्शन: ट्रंप और दिवंगत अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच पुराने रिश्तों की चर्चा आम है। आशंका जताई जा रही है कि इन नए दस्तावेजों में ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली बातचीत या सबूत हो सकते हैं।

अटॉर्नी जनरल पॉम बोन्डी: क्या 'वफादार' अब राज़ उगलेंगी?

ट्रंप के लिए दूसरी सबसे बुरी खबर उनकी अटॉर्नी जनरल पॉम बोन्डी के बारे में है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेजों को लेकर जांच समितियों को गुमराह किया। अब अमेरिकी हाउस (House of Representatives) ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है।

एक हाई-वोल्टेज वोटिंग में 24 सदस्यों ने बोन्डी को नोटिस भेजने के पक्ष में मतदान किया। इसका मतलब साफ है—अब बोन्डी को कमेटी के सामने पेश होकर शपथ के साथ सच बोलना होगा।

क्या बोन्डी खुद को बचाने के लिए ट्रंप के खिलाफ जा सकती हैं?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर बोन्डी ने इन फाइलों के गायब होने के पीछे की असली कहानी बताई, तो यह ओवल ऑफिस तक पहुंच सकती है। जवाब न देने या झूठ बोलने पर उन पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है, जो कि एक अटॉर्नी जनरल के लिए करियर खत्म कर देने वाला हो सकता है।

क्यों यह समय ट्रंप के लिए सबसे खराब है?

डोनाल्ड ट्रंप अपनी प्रेसीडेंसी के सबसे मुश्किल दौर का सामना कर रहे हैं। एक ओर, विदेशी मोर्चे पर ईरान के साथ सैन्य तनातनी अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर, ये कानूनी खुलासे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जनता का भरोसा: युद्ध के समय देश एक मजबूत नेता चाहता है, लेकिन 'सेक्स स्कैंडल' से जुड़े फाइल्स का सामने आना नैतिक प्रश्न खड़ा करता है।

कानूनी शिकंजा: अगर इन फाइलों में कोई भी आपत्तिजनक सामग्री मिली, तो विपक्ष इसे महाभियोग या जांच का आधार बना सकता है।

पार्टी के भीतर दबाव: रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता अब इन खुलासों को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।

क्या यह ट्रंप के 'चेकमेट' की शुरुआत है?

एपस्टीन फाइल्स का जिन्न जब भी बाहर आता है, तबाही लेकर आता है। 50,000 पन्ने सिर्फ कागज नहीं हैं, बल्कि अमेरिका के शीर्ष पर बैठे लोगों के उन राज़ हैं जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही थी। अगले एक हफ्ता अमेरिकी राजनीति के लिए 'मेक या ब्रेक' साबित होने वाला है।

क्या ट्रंप इस दोहरी चुनौती से उबर पाएंगे या ईरान के साथ युद्ध से पहले उन्हें अपने ही घर में हार का सामना करना पड़ेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


Ajit Kumar Pandey

Ajit Kumar Pandey

पत्रकारिता की शुरुआत साल 1994 में हिंदुस्तान अख़बार से करने वाले अजीत कुमार पाण्डेय का मीडिया सफर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने दैनिक जागरण, अमर उजाला, आज तक, ईटीवी, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंट और दैनिक जनवाणी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया। न्यू मीडिया की तकनीकों को नजदीक से समझते हुए उन्होंने खुद को डिजिटल पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित किया। करीब 31 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ अजीत कुमार पाण्डेय आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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