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क्या है बाब-अल-मंदेब? बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने के बाद जानकारी है कि ईरान बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को भी बंद करने की सोच रहा है।

Kumar
क्या है बाब-अल-मंदेब? बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया!
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वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व के रणक्षेत्र से उठ रही बारूद की गंध अब पूरी दुनिया की रसोई और जेब तक पहुंचने वाली है। इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा यह युद्ध अब केवल मिसाइलों और ड्रोनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक भयानक ऊर्जा युद्ध में तब्दील हो चुका है। ताजा रिपोर्टों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि ईरान अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री धमनियों को काटने की तैयारी कर रहा है।

होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर संकट के बादल

दुनिया अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के सदमे से उबर भी नहीं पाई थी कि तेहरान के युद्ध कक्ष से एक और डराने वाली खबर आई है। रणनीतिक सूत्रों के अनुसार ईरान अब अरब प्रायद्वीप के पास स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की योजना बना रहा है। यह रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के माध्यम से एशिया को यूरोप से जोड़ने वाला सबसे छोटा समुद्री मार्ग है। यमन और जिबूती के बीच स्थित यह संकरा रास्ता वैश्विक व्यापार की रीढ़ है। अगर ईरान इसे ब्लॉक करता है तो इसका मतलब होगा कि दुनिया का व्यापारिक नक्शा दो हिस्सों में बंट जाएगा। जहाजों को हजारों मील की अतिरिक्त दूरी तय कर अफ्रीका के चक्कर लगाकर जाना होगा, जिससे माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ जाएगी।


ईरान की दोटूक चेतावनी: युद्ध कब रुकेगा, यह हम तय करेंगे

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि ईरान में चल रहा युद्ध अपने अंतिम चरण में है। लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दुनिया को चेतावनी दी है। ईरान का रुख साफ है-युद्ध की समाप्ति का फैसला वॉशिंगटन नहीं, बल्कि तेहरान करेगा। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका या इजरायल ने उनके सर्वोच्च नेता या रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया तो वे आत्मघाती आर्थिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। तेहरान ने धमकी दी है कि वह अपने इलाके से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। यह केवल धमकी नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक घेराबंदी की शुरुआत मानी जा रही है।

तेल बाजार में हाहाकार : $120 के करीब पहुंचा कच्चा तेल

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जो मंजर दिखा, उसने 1970 के दशक के तेल संकट की याद दिला दी। कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर गईं।

ब्रेंट क्रूड : अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत $119.50 प्रति बैरल तक जा पहुंची।

सप्लाई शॉक : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन की सप्लाई रुकने से बाजार में हड़कंप है। यह वैश्विक तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा है।

कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल पार करने की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि बाब-अल-मंदेब भी बंद होता है तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात निर्भर देशों पर पड़ेगा, जहां माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक सब कुछ महंगा हो जाएगा।

थमने लगा है खाड़ी देशों का उत्पादन

जंग के दूसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही फारस की खाड़ी के तेल और गैस क्षेत्रों में सन्नाटा पसरने लगा है। समुद्री रास्ते बंद होने और सुरक्षा जोखिमों के कारण सऊदी अरब, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे बड़े तेल उत्पादकों को अपना उत्पादन घटाने पर मजबूर होना पड़ा है। जब तेल भेजने का रास्ता ही सुरक्षित नहीं है, तो उत्पादन को स्टोर करना इन देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?

यह संकट केवल चार्ट और आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका मानवीय और आर्थिक पक्ष अत्यंत गंभीर है:

महंगाई का नया चक्र : ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब है उत्पादन लागत में वृद्धि। इससे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।

सप्लाई चेन का टूटना : बाब-अल-मंदेब बंद होने से केवल तेल ही नहीं, बल्कि अनाज, कच्चा माल और तैयार उत्पादों की सप्लाई भी बाधित होगी।

सामरिक अस्थिरता : ईरान का यह कदम अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए उकसा सकता है, जिससे यह क्षेत्रीय युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट में बदल सकता है।

बाब-अल-मंदेब और होर्मुज की लहरों पर टिकीं पूरी दुनिया की सांसें

मिडिल ईस्ट का यह ब्लैक गोल्ड यानी कच्चा तेल अब दुनिया के लिए सिरदर्द बन गया है। आने वाले कुछ दिन और ईरान की अगली चाल यह तय करेगी कि क्या दुनिया एक और गहरे आर्थिक अवसाद की ओर बढ़ेगी या कूटनीति इस जलते हुए संकट को शांत कर पाएगी। फिलहाल बाब-अल-मंदेब और होर्मुज की लहरों पर पूरी दुनिया की सांसें टिकी हैं।


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