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अमेरिकी एयरपोर्ट पर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं

डीएचएस शटडाउन और स्टाफ की कमी से अमेरिकी एयरपोर्ट पर लंबी सुरक्षा कतारें, यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

Mishra
अमेरिकी एयरपोर्ट पर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं
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वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।

अमेरिका के कई हवाई अड्डों पर यात्रियों को हाल के दिनों में सुरक्षा जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि यात्रियों को अपनी फ्लाइट से चार से पांच घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचने की सलाह दी गई। इन लंबी कतारों की बड़ी वजह अमेरिकी आंतरिक सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security – DHS) का आंशिक शटडाउन बताया जा रहा है।

सरकारी फंडिंग रुकने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारियों की संख्या प्रभावित हुई है और ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) के एजेंट बिना वेतन काम करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही स्प्रिंग ब्रेक के दौरान यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ने से स्थिति और जटिल हो गई है।

इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि यदि किसी देश की सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक तंत्र में अचानक व्यवधान आ जाए तो उसका असर आम यात्रियों और एयरपोर्ट संचालन पर कितना बड़ा हो सकता है।

किन एयरपोर्ट्स पर सबसे ज्यादा परेशानी

रविवार को अमेरिका के टेक्सास और लुइसियाना राज्यों के कुछ प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ा।


ह्यूस्टन के विलियम पी. हॉबी एयरपोर्ट पर सामान्य सुरक्षा जांच के लिए इंतजार का समय एक समय तीन घंटे तक पहुंच गया था। एयरपोर्ट प्रशासन ने पहले यात्रियों से जल्दी आने की अपील की, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ने पर उन्हें चार से पांच घंटे पहले पहुंचने की सलाह देनी पड़ी।

ह्यूस्टन एयरपोर्ट सिस्टम, जिसमें जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल एयरपोर्ट भी शामिल है, ने कहा कि सरकारी शटडाउन के कारण सुरक्षा संचालन रोजाना और हर शिफ्ट में प्रभावित हो सकता है। हालांकि जॉर्ज बुश एयरपोर्ट पर कुछ समय तक प्रतीक्षा समय केवल कुछ मिनट ही रहा।

वहीं न्यू ऑरलियंस के लुइस आर्मस्ट्रांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने बताया कि TSA एजेंटों की कमी के कारण सुरक्षा जांच लाइनों में औसत से ज्यादा भीड़ हो रही है। यहां यात्रियों को तीन घंटे पहले आने की सलाह दी गई और चेतावनी दी गई कि इंतजार दो घंटे तक हो सकता है।

DHS शटडाउन क्या है और क्यों हुआ

अमेरिका में सरकारी एजेंसियों को चलाने के लिए कांग्रेस से फंडिंग मिलती है। जब बजट या फंडिंग पर सहमति नहीं बनती तो कई सरकारी विभागों का कामकाज सीमित हो जाता है या आंशिक रूप से बंद हो जाता है। इसे सरकारी शटडाउन कहा जाता है।

वर्तमान संकट 14 फरवरी से शुरू हुआ जब आंतरिक सुरक्षा विभाग के लिए फंडिंग रुक गई।


डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा है कि जब तक संघीय आव्रजन अभियानों पर नई पाबंदियां नहीं लगाई जातीं तब तक DHS को फंडिंग नहीं दी जाएगी। यह विवाद मिनियापोलिस में जनवरी के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों की गोलीबारी में मौत के बाद बढ़ा।

फंडिंग रुकने के कारण कई कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा, हालांकि सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी काम जारी रखने के लिए बाध्य हैं। इससे मनोबल और कार्यबल दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

TSA एजेंटों पर दबाव

एयरपोर्ट सुरक्षा का जिम्मा मुख्य रूप से TSA एजेंटों पर होता है। ये एजेंट यात्रियों की जांच, सामान स्कैनिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करते हैं।

लेकिन DHS शटडाउन के दौरान इन कर्मचारियों को बिना वेतन काम करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कई कर्मचारी छुट्टी लेने या काम से अनुपस्थित रहने का विकल्प चुन सकते हैं।

परिणामस्वरूप एयरपोर्ट पर उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या कम हो जाती है और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यही वजह है कि यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका में मार्च के आसपास स्कूल और कॉलेजों में स्प्रिंग ब्रेक का समय होता है। इस दौरान लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा करते हैं।

एयरलाइंस उद्योग के अनुसार इस साल स्प्रिंग ब्रेक में रिकॉर्ड संख्या में लोग हवाई यात्रा कर सकते हैं। ऐसे में पहले से कम स्टाफ और ज्यादा यात्रियों का संयोजन एयरपोर्ट संचालन के लिए चुनौती बन गया है।

एयरलाइंस की चिंता

अमेरिकी एयरलाइंस के संगठन “एयरलाइंस फॉर अमेरिका” के प्रमुख क्रिस सुनुनु ने सरकार और कांग्रेस से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि एयरलाइंस ने बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए अपनी तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सरकारी एजेंसियों पर निर्भर करती है।


उनके अनुसार देश की परिवहन सुरक्षा व्यवस्था इतनी महत्वपूर्ण है कि इसे राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

ह्यूस्टन एयरपोर्ट पर लंबी कतारों में फंसे यात्रियों में जेसिका एंडरसन एलेक्सी भी शामिल थीं, जो अपने दो बच्चों के साथ न्यू ऑरलियंस लौटने की कोशिश कर रही थीं।

वे वर्ल्ड बेसबॉल क्लासिक देखने के लिए ह्यूस्टन आई थीं और फ्लाइट से तीन घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंच गई थीं। लेकिन लंबी कतार देखकर उन्हें समझ आ गया कि वे समय पर फ्लाइट नहीं पकड़ पाएंगी।

कतार में खड़े रहते हुए उन्होंने किराए की कार ढूंढने की कोशिश भी की ताकि सड़क मार्ग से घर लौट सकें, लेकिन कोई कार उपलब्ध नहीं थी।

करीब साढ़े तीन घंटे बाद वे सुरक्षा जांच पार कर सकीं और बाद में उन्हें दूसरी फ्लाइट मिल गई।

उन्होंने बताया कि न्यू ऑरलियंस एयरपोर्ट पर भी स्थिति बेहद खराब थी और सुरक्षा जांच की लाइन पार्किंग गैरेज तक पहुंच गई थी।

भारत के लिए क्या सबक

अमेरिका में एयरपोर्ट अव्यवस्था का यह मामला भारत जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।

भारत में भी त्योहारों, छुट्टियों और बड़े आयोजनों के दौरान हवाई अड्डों पर भीड़ बढ़ जाती है। हाल के वर्षों में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े एयरपोर्ट पर यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ा है।

हालांकि भारत में एयरपोर्ट सुरक्षा का संचालन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) द्वारा किया जाता है और सरकार अक्सर अतिरिक्त स्टाफ या अस्थायी व्यवस्थाओं के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बढ़ती हवाई यात्रा को देखते हुए सुरक्षा स्टाफ, स्वचालित जांच प्रणाली और बेहतर प्रबंधन रणनीतियों की जरूरत होगी।

आगे क्या हो सकता है

यदि DHS शटडाउन लंबा चलता है तो अमेरिका के अन्य एयरपोर्ट पर भी ऐसी ही समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

सरकार और कांग्रेस के बीच समझौता होने तक एयरपोर्ट संचालन दबाव में रह सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को फिलहाल अतिरिक्त समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचना चाहिए और यात्रा से पहले फ्लाइट की स्थिति जांचते रहना चाहिए।


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