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क्यों डे लाइट सेविंग टाइम स्थायी रूप से अपनाएगा ब्रिटिश कोलंबिया

ब्रिटिश कोलंबिया ने डे लाइट सेविंग टाइम स्थायी किया; समय परिवर्तन बंद किया, सामाजिक व्यवधान कम होंगे, और स्थानीय पसंद प्रभावी होगी

Mishra
क्यों डे लाइट सेविंग टाइम स्थायी रूप से अपनाएगा ब्रिटिश कोलंबिया
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वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत ने 8 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए घोषणा की कि वह अब हर साल घड़ियाँ आगे‑पीछे नहीं करेगा और डे लाइट सेविंग टाइम (दिन के प्रकाश के अनुसार समय) को स्थायी रूप से लागू करेगा। इससे वर्षों से होती आ रही समय परिवर्तन‑प्रथा का अंत हो रहा है। यह बदलाव न केवल प्रांत के दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा बल्कि व्यापार, स्कूल, परिवहन और अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में भी संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिवर्तन वैश्विक समय प्रणाली में एक नया अध्याय उद्घाटित करेगा।

ब्रिटिश कोलंबिया का इतिहास

पिछले कई दशकों से, ब्रिटिश कोलंबिया में लोग दो बार हर साल समय बदलते थे — मार्च में घड़ियाँ एक घंटा आगे और नवंबर में एक घंटा पीछे — ताकि दिन के प्रकाश का बेहतर उपयोग हो सके। इस प्रथा को डे लाइट सेविंग टाइम कहते हैं, जिसका उद्देश्य शाम को अधिक रोशनी देना और ऊर्जा की बचत करना है।

लेकिन कुछ समुदाय, जैसे पूर्वी ब्रिटिश कोलंबिया का छोटा शहर क्रेस्टन, सदियों से अलग रहा है। 1998 से क्रेस्टन ने अपने पड़ोसी इलाकों की तरह समय नहीं बदला और कभी‑कभी एक अलग समय क्षेत्र की तरह काम करता रहा।

2 मार्च 2026 को प्रांत के प्रधानमंत्री डेविड एबी ने घोषणा की कि 8 मार्च की सुबह से अधिकांश ब्रिटिश कोलंबिया घड़ियां सिर्फ एक आखिरी बार आगे करेंगे और फिर कभी पीछे नहीं करेंगे। इसके बाद से यह क्षेत्र स्थायी रूप से डे लाइट सेविंग टाइम में रहेगा — यानी समय परिवर्तन की परम्परा समाप्त हो जाएगी।

इस नए नियम के तहत प्रांत को एक नए “पैसिफिक टाइम” क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिसका मतलब है कि समय स्थायी रूप से यूटीसी‑7 घंटे पीछे रहेगी। पूर्व में प्रांत पैसिफिक मानक टाइम और पैसिफिक डे लाइट टाइम के बीच बदलाव करता था, लेकिन अब यह बदलाव समाप्त हो जाएगा।


प्रांत सरकार ने कहा है कि यह निर्णय जनता की इच्छा और व्यावहारिक आवश्यकताओं के आधार पर लिया गया है, क्योंकि सालाना समय बदलने से सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियां उत्पन्न होती थीं।

लोगों ने क्या कहा

2019 में आयोजित एक सार्वजनिक सर्वेक्षण में रिकॉर्ड 2.23 लाख लोगों ने भाग लिया। उनमें से लगभग 93 प्रतिशत ने कहा था कि वे स्थायी डे लाइट सेविंग टाइम चाहते हैं और समय परिवर्तन से छुटकारा पाना चाहते हैं।

प्रांत सरकार की राय यह है कि समय को स्थिर रखने से दैनिक जीवन में अधिक सुरक्षा और स्थिरता, स्कूल और काम के कार्यक्रमों में कम व्यवधान, और सर्दियों में शाम को अधिक रोशनी मिलेगा।

ब्रिटिश कोलंबिया में समय परिवर्तन समाप्त होने से कई सामाजिक और तकनीकी बदलाव दिखाई देंगे। वर्ष 2026 में इस निर्णय के तहत घड़ियां अब नवंबर में पीछे नहीं होंगी। अधिकांश प्रांत स्थायी रूप से पैसिफिक टाइम (यूटीसी7) पर रहेगा। पूर्व में माउंटेन टाइम वाले क्षेत्र जैसे पीस रीज़न अब सामान्य समय क्षेत्र से जुड़ेंगे। कुछ इलाके — जैसे पूर्वी रूप से पर्वतीय समय क्षेत्र वाले शहर — अपनी पसंद के अनुसार समय चुन सकते हैं।

इससे यह संभावना भी खुलती है कि प्रांत के भीतर और समय क्षेत्र “आइलैंड” बन सकते हैं, जैसा कि क्रेस्टन का उदाहरण रहा है।

व्यापार, यात्रा और सीमा पार प्रभाव

समय परिवर्तन के अंत ने कुछ उद्योग समूहों में चिंता भी पैदा की है। व्यापार नेताओं का कहना है कि एकतरफा समय बदलाव से कारोबारियों को परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो यूनाइटेड स्टेट्स के साथ व्यापार और यात्रा करते हैं, क्योंकि सीमान्त राज्यों ने अभी तक ऐसा बदलाव नहीं किया है।


वैनकूवर हवाई अड्डा प्राधिकरण ने कहा है कि वह शेड्यूल और यात्री परिवहन पर संभावित प्रभावों को समझने के लिए उद्योगो के साथ मिलकर काम करेगा।

समय परिवर्तन को हटाने के समर्थन में एक तर्क यह भी रहा है कि बार‑बार घड़ियाँ बदलने से लोगों के नींद चक्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शोध बताते हैं कि दो बार समय बदलने से शरीर की प्राकृतिक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) प्रभावित होती है, जिससे नींद की समस्या, दुर्घटनाएं और कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थायी डे लाइट टाइम के बजाय स्थायी मानक समय (जो सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ अधिक मेल खाता है) बेहतर स्वास्थ्य परिणाम दे सकता है। लेकिन ब्रिटिश कोलंबिया में जनता की प्राथमिकता स्थायी डे लाइट टाइम रही है।

आगे क्या

ब्रिटिश कोलंबिया के इस निर्णय से कनाडा और अन्य हिस्सों में समय‑नियम में परिवर्तन की बहस और तेज़ हुई है। कई लोग मानते हैं कि एक समान समय क्षेत्र होने से व्यापार, यात्रा और सामाजिक समन्वय में सुविधा होगी, जबकि कुछ कहते हैं कि यह निर्णय अलग-अलग नियमों वाले क्षेत्रों के साथ जटिलता भी ला सकता है।

कुछ विश्लेषक और जनता उम्मीद करते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका भी भविष्य में इसी तरह का निर्णय ले सकता है, जिससे सीमा पार व्यापार और समय ताल-मिलान और आसान होगा।


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