हंगरी ने क्यों जब्त किया यूक्रेन का सोना और नकदी
हंगरी के यूक्रेनी नकदी और सोने की जब्ती ने युद्ध के बीच यूरोप में नया कूटनीतिक विवाद और तनाव पैदा किया

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।
यूक्रेन युद्ध के चौथे साल में प्रवेश कर चुका है और अब संघर्ष सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। हाल के दिनों में यूक्रेन और हंगरी के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद सामने आया है, जिसने यूरोप की राजनीति को भी असहज कर दिया है।
विवाद की वजह है यूक्रेन से भेजी जा रही नकदी और सोने की एक खेप, जिसे हंगरी के अधिकारियों ने अपने देश से गुजरते समय जब्त कर लिया। इस कार्रवाई के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हंगरी पर “डकैती” जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
इस घटना ने न केवल दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ाया है, बल्कि यूरोप में चल रही व्यापक राजनीतिक खींचतान को भी उजागर किया है।
क्या है पूरा मामला
हंगरी के अधिकारियों ने पिछले सप्ताह सड़क मार्ग से ले जाई जा रही एक खेप को जब्त किया।
इस खेप में लगभग 4 करोड़ डॉलर नकद, 3.5 करोड़ यूरो नकद, लगभग 9 किलोग्राम सोना, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 15 लाख डॉलर आंकी गई। हंगरी की टैक्स अथॉरिटी ने संदेह जताया कि इस पैसे का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हो सकता है। इसी वजह से इस खेप को हिरासत में लिया गया। प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने आदेश दिया है कि जांच पूरी होने तक इस धन और सोने को 60 दिनों तक हिरासत में रखा जाएगा।
यूक्रेन ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए कड़ा विरोध किया है। राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि हंगरी की सरकार ने बदमाशी या बैंडिट्री जैसा व्यवहार किया है। उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे इस मामले में चुप न रहें और हंगरी के कदम की आलोचना करें।
यूक्रेन का आरोप है कि हंगरी की सरकार रूस के प्रति नरम रुख रखती है और यही वजह है कि इस कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
गैस और तेल पाइपलाइन विवाद से जुड़ा मामला
विश्लेषकों के मुताबिक इस घटना का संबंध हाल ही में हुए एक ऊर्जा विवाद से भी हो सकता है। हंगरी और स्लोवाकिया ने यूक्रेन पर आरोप लगाया था कि वह एक तेल पाइपलाइन की मरम्मत में जानबूझकर देरी कर रहा है। यह पाइपलाइन रूस के एक ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई थी।
ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव पहले ही बढ़ चुका था। नकदी और सोने की जब्ती उसी पृष्ठभूमि में हुई, इसलिए इसे केवल कानूनी मामला नहीं बल्कि राजनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
कूटनीतिक विवाद के बीच रूस और यूक्रेन दोनों ने युद्धक्षेत्र में अपनी-अपनी सफलता के दावे किए हैं। यूक्रेन का कहना है कि उसने हालिया जवाबी कार्रवाई में दक्षिण-पूर्वी द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र के अधिकांश इलाके वापस ले लिए हैं। यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार लगभग 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से रूसी सैनिकों को पीछे हटाया गया है।
दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि उनकी सेना पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में लगातार बढ़त बना रही है। पुतिन के अनुसार छह महीने पहले यूक्रेन डोनबास के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखता था, जो अब घटकर लगभग 15 से 17 प्रतिशत रह गया है।
युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस और यूक्रेन के बीच एक और दौर की बातचीत का प्रस्ताव रखा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति के अनुसार यह वार्ता स्विट्जरलैंड या तुर्की में आयोजित की जा सकती है। पहले संयुक्त अरब अमीरात में बैठक की योजना थी, लेकिन ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वह योजना बाधित हो गई।
संभावित वार्ता में युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की एक जांच टीम ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच के अनुसार रूस ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से हजारों बच्चों को जबरन रूस भेजा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह कदम मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
अब तक कम से कम 1205 मामलों की पुष्टि की गई है, और जांच में शामिल बच्चों में से लगभग 80 प्रतिशत अब तक वापस नहीं लौट पाए हैं।
युद्ध के नए हमले
हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले भी तेज कर दिए हैं। यूक्रेन ने रूस के ब्रायंस्क क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री पर हमला किया, जहां मिसाइलों के लिए महत्वपूर्ण पुर्जे बनाए जाते हैं। बताया गया कि इस हमले में ब्रिटेन द्वारा दिए गए स्टॉर्म शैडो मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।
रूस के अनुसार इस हमले में छह नागरिकों की मौत और 37 लोग घायल हुए। वहीं रूस ने भी यूक्रेन के शहर स्लोवियांस्क पर निर्देशित बम गिराए, जिसमें चार लोगों की मौत और कई लोग घायल हो गए।
युद्ध का असर अब सांस्कृतिक मंचों पर भी दिखाई दे रहा है। इटली में होने वाले प्रतिष्ठित वेनिस बिएनाले कला प्रदर्शनी में रूस को भाग लेने की अनुमति देने के फैसले पर यूरोपीय संघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूरोपीय आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आयोजन को मिलने वाली यूरोपीय फंडिंग पर असर पड़ सकता है।
जानकारों ने कहा कि यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रहा, बल्कि राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और संस्कृति तक फैल चुका है। हंगरी द्वारा नकदी और सोने की जब्ती जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि युद्ध के प्रभाव यूरोप की आंतरिक राजनीति तक पहुंच चुके हैं। आने वाले समय में यह विवाद यूरोपीय संघ के भीतर नए राजनीतिक तनाव को जन्म दे सकता है।


