योनि मुद्रा: थायराइड और PCOD में रामबाण, जानें हार्मोनल संतुलन का यह प्राचीन तरीका
बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में थायरॉइड और PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, 'योनि मुद्रा' का नियमित अभ्यास इन समस्याओं को नियंत्रित करने में अत्यंत सहायक है।

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में थायरॉइड और PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, 'योनि मुद्रा' का नियमित अभ्यास इन समस्याओं को नियंत्रित करने में अत्यंत सहायक है। यह मुद्रा शरीर की आंतरिक ऊर्जा और प्रजनन प्रणाली को सक्रिय कर हार्मोनल असंतुलन को प्राकृतिक रूप से ठीक करती है।
हार्मोनल बदलाव का असर
यह मुद्रा न केवल पीसीओडी के लक्षणों जैसे अनियमित पीरियड्स और इनफर्टिलिटी में राहत देती है, बल्कि तनाव कम कर मन को शांति भी प्रदान करती है। इसे प्रतिदिन 15-20 मिनट करने से थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता में सुधार होता है। यह शरीर और प्राण के बीच सामंजस्य स्थापित कर महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता, उसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखने लगता है। नींद का टूटना, चिड़चिड़ापन, हार्मोनल गड़बड़ी, और इम्युनिटी का कमजोर होना, ये सब तनाव के ही कारण हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय योग करने की सलाह देता है।
योग की कई मुद्राएं
योग की कई मुद्राएं हैं, लेकिन कुछ मुद्राएं ऐसी होती हैं जो बाहर से बहुत साधारण दिखती हैं, पर अंदर गहरा बदलाव लाती हैं। योनि मुद्रा उन्हीं में से एक है।आयुष मंत्रालय के अनुसार, योनि मुद्रा मन को शांत करने में मदद करती है। जब इंसान अपनी सांस, विचार और ऊर्जा पर ध्यान देता है, तो इससे तनाव दूर होता है और मन को अलग शांति मिलती है। इसे करने के लिए सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं, आंखें बंद करें और हाथों की उंगलियों से एक विशेष आकृति बनाकर कुछ समय तक गहरी सांस के साथ ध्यान करें। यह सरल क्रिया पूरे तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करती है।
'योनि मुद्रा' का नियमित अभ्यास
जब हम योनी मुद्रा में बैठते हैं, तो बाहरी शोर-शराबा धीरे-धीरे मन से दूर होने लगता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार लगातार अभ्यास करने से तनाव हार्मोन का स्तर घटने लगता है, जिससे चिंता, डर और बेचैनी में राहत मिलती है। यही वजह है कि यह मुद्रा उन लोगों के लिए भी उपयोगी मानी जाती है जो लंबे समय से मानसिक दबाव में रहते हैं। हार्मोनल संतुलन के मामले में भी योनि मुद्रा को खास माना गया है। महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव का असर सीधे मूड, पीरियड्स और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर की आंतरिक ग्रंथियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है। पुरुषों के लिए भी यह मुद्रा फायदेमंद है क्योंकि यह तनाव से जुड़ी हार्मोनल गड़बड़ियों को शांत करने में मदद करती है।
शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित
आयुष मंत्रालय के अनुसार, जब मन शांत होता है, तो शरीर की रक्षा प्रणाली बेहतर ढंग से काम करती है। योनि मुद्रा के अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है और छोटी-मोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में यह मुद्रा बेहद उपयोगी मानी जाती है। आज बच्चों से लेकर बड़ों तक ध्यान भटकने की समस्या आम हो गई है। योनि मुद्रा मन को एक बिंदु पर टिकाने में मदद करती है। धीरे-धीरे सोच साफ होती है, निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है, और काम में मन लगने लगता है। थायरॉइड और पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी योनि मुद्रा राहत दिलाने का काम करती है। यह शरीर के संतुलन को सुधारकर इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करती है। मासिक धर्म की अनियमितता में भी इसका असर देखा गया है, क्योंकि यह तनाव कम कर हार्मोनल संतुलन को ठीक करती है।


