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पूर्व एसटीएफ सिपाही और कफ सिरप कारोबार का मुख्य आरोपी आलोक प्रताप सिंह फरार, STF ने कई जिलों में मारा छापा

पूर्व एसटीएफ सिपाही आलोक प्रताप सिंह फरार, कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप सप्लाई मामले में एसटीएफ की कई जिलों में छापेमारी। आलोक और अमित सिंह ने मिलकर करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार किया। बाहुबली और कुछ सफेदपोश भी रडार पर।

पूर्व एसटीएफ सिपाही और कफ सिरप कारोबार का मुख्य आरोपी आलोक प्रताप सिंह फरार, STF ने कई जिलों में मारा छापा
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कफ सिरप कांड।

लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। पूर्व एसटीएफ सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप की अवैध सप्लाई मामले में सामने आया है। मामले की जांच कर रही एसटीएफ आलोक की तलाश में लगी हुई है, लेकिन अभी तक उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिली।सूत्रों के अनुसार, जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और मिर्जापुर समेत कई जिलों में एसटीएफ ने दबिश दी, लेकिन आलोक का कोई सुराग नहीं मिला।जांच में पता चला कि आमित सिंह टाटा के साथ मिलकर आलोक ने भी एक फर्म बनाई थी, जिसके माध्यम से नशीले कफ सिरप की सप्लाई की गई। सूत्रों के मुताबिक, आलोक की फर्म से लाखों रुपये का लेन-देन हुआ। इस मामले से जुड़े दस्तावेज शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसमें साफ लिखा था कि अमित सिंह ने पूछताछ में आलोक का नाम लिया।

दोनों ने 5-5 लाख निवेश कर लगभग 22 लाख की कमाई की

जानकारी के अनुसार, अमित और आलोक ने जनवरी 2024 में फर्म खोली थी। इस फर्म का सारा लेन-देन शुभम जायसवाल, वरुण सिंह, गौरव जायसवाल और विशाल मेहरोत्रा देख रहे थे। धनबाद में दोनों ने 5-5 लाख रुपये निवेश कर लगभग 22 लाख रुपये की कमाई की। आरोपियों ने कफ सिरप की सप्लाई के लिए कई बार धनबाद की यात्रा भी की।इसके अलावा, आलोक और अमित ने अपने-अपने नाम से वाराणसी में भी फर्म खोली। आलोक ने अपनी फर्म का नाम “मां शारदा मेडिकल” रखा। दो-तीन महीनों के भीतर दोनों ने वाराणसी फर्म में कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप का व्यापार किया और नकद में लगभग 8 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। अमित ने यह पैसा अपनी पत्नी के खाते में जमा किया।

एक विधायक के करीबी का नाम भी सामने आया

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में पूर्वांचल का एक बाहुबली और एक विधायक के करीबी का नाम भी सामने आया है। फिलहाल, एसटीएफ ने बाहुबली से पूछताछ नहीं की है। माना जा रहा है कि आलोक के गिरफ्तारी के बाद कई बड़े और सफेदपोश लोगों के नाम सामने आएंगे।एसटीएफ आलोक की संपत्ति और उसके नेटवर्क के बारे में भी पता लगा रही है। जांच अधिकारी मान रहे हैं कि यह मामला न केवल अपराधियों बल्कि श्वेतपोश और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों तक फैला हुआ है।

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