यूपी में एक दिसंबर से ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम बदलने की तैयारी, नई एजेंसियों ने संभाला जिम्मा
उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। स्मार्ट चिप कंपनी की जगह अब तीन निजी एजेंसियां काम संभालेंगी। लखनऊ में सिल्वर टच डीएल बनाने का काम करेगी।
ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में बदलाव।लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रक्रियाओं में बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। परिवहन विभाग ने डीएल निर्माण और प्रबंधन का काम अब नई निजी एजेंसियों को सौंप दिया है। लंबे समय से यह कार्य संभाल रही स्मार्ट चिप कंपनी की जगह अब तीन अलग-अलग एजेंसियां पूरे प्रदेश में संचालन करेंगी।
तकनीकी अपग्रेडेशन का काम लगभग पूरा
सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत सभी जिलों में हार्डवेयर इंस्टॉलेशन और तकनीकी अपग्रेडेशन का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इसी कारण बीते सप्ताह 3–4 दिनों तक डीएल अप्रूवल प्रक्रिया बंद रही, जिससे हजारों आवेदकों को परेशानी उठानी पड़ी। लेकिन अब सोमवार से नई एजेंसियों के कर्मचारी सिस्टम ऑपरेट करना शुरू करेंगे और ट्रायल रन के साथ कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है।
तीन कंपनियों को मिली प्रदेश की जिम्मेदारी
परिवहन विभाग ने डीएल से जुड़े कामकाज तीन निजी एजेंसियों में बांट दिया है।
सिल्वर टच : लखनऊ व आसपास के क्षेत्र
फोकाम नेट : प्रदेश के कई अन्य जिले
रोजमार्टा : शेष जिलों की जिम्मेदारी
अब तक स्मार्ट चिप कंपनी के लगभग 300 कर्मचारी डीएल निर्माण, प्रिंटिंग और अनुमोदन के कार्य में लगे थे। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के साथ इन कर्मचारियों को अलग-अलग जिलों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
स्टाफ रोटेशन से बदलेगी आरटीओ व्यवस्था
लखनऊ आरटीओ में नई एजेंसी के स्टाफ की तैनाती से मौजूदा कर्मचारियों की तैनाती में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। जो कर्मचारी एक दशक से अपने गृह जिले में काम कर रहे थे, उन्हें अब अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। वहीं बाहरी जिलों के कर्मचारियों को लखनऊ में जिम्मेदारी दी जाएगी।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा
डीएल से जुड़े सभी काम अब निजी एजेंसी के कर्मचारी संचालित करेंगे। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम अपडेट होने से प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। आवेदकों को अब पिछले हफ्ते जैसी रुकावटें नहीं झेलनी पड़ेंगी। नई एजेंसी सिस्टम की टेस्टिंग के बाद पूरा कामकाज सुचारू रूप से चलाने का दावा कर रही है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद डीएल निर्माण से लेकर प्रिंटिंग और डिस्पैच तक की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व समयबद्ध होने की उम्मीद है।
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