Moradabad: दवाओं की कीमतों में 10% सालाना बढ़ोतरी पर रोक की मांग
संगठन ने दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग करते हुए फार्मास्युटिकल्स विभाग को ज्ञापन भेजा है।

मुरादाबाद वाईबीएन संवाददाता। उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन (UPMSRA) ने देश में गैर-निर्धारित (नॉन-शेड्यूल्ड) दवाइयों की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ चिंता जताई है। संगठन ने दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग करते हुए फार्मास्युटिकल्स विभाग को ज्ञापन भेजा है।
नॉन-शेड्यूल्ड दवाइयों की कीमतें आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं
UPMSRA ने अपने ज्ञापन में कहा कि देश में स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा दवाइयों पर होता है, जिसमें नॉन-शेड्यूल्ड दवाइयों की कीमतें आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं। हर साल इन दवाइयों की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे मरीजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन का आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीति का फायदा उठाकर दवा कंपनियां हर साल कीमतों में अधिकतम बढ़ोतरी कर रही हैं। “मार्केट तय करेगा” वाली नीति दामों को नियंत्रित करने में विफल साबित हुई है और बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा रही हैं।
बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां ही सबसे महंगी हैं
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में भी इस बात पर चिंता जताई थी कि बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां ही सबसे महंगी हैं। वहीं संसद की स्थायी समिति ने भी 2022 और 2025 में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए नीति की समीक्षा करने की सिफारिश की है।
UPMSRA ने मांग की है कि सरकार नॉन-शेड्यूल्ड दवाइयों की मूल्य निर्धारण नीति को दोबारा जांचे और एक पारदर्शी एवं डेटा आधारित व्यवस्था लागू करे, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।अंत में संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगी।


