नोएडा का बुरा हाल, देश के सबसे प्रदूषित शहरों में दूसरे नंबर परः CREA
सीआरईए के मुताबिक नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हवा इतनी खराब है कि प्रदूषण के मामले में दूसरे और चौथे नंबर पर रहे। प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद पहले स्थान पर।

नोएडा, वाईबीएन न्यूज। उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 2025-26 की सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब और चिंताजनक रही। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरइए) की ताजा रिपोर्ट आंखे खोलने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्रमशः दूसरे और चौथे स्थान पर रहे, जबकि पड़ोसी गाजियाबाद नंबर वन पर रहा। रिपोर्ट में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालाता और खराब हो सकते हैं।
केवल कुछ ही दिन संतोषजनक रही हवा
रिपोर्ट के मुताबिक एक अक्टूबर, 2025 से 28 फरवरी, 2026 बीच नोएडा में पीएम 2.5 का औसत स्तर 166 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। वहीं ग्रेटर नोएडा में यह स्तर 151 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा। गाजियाबाद में स्थिति इससे भी खराब रही, जहां पीएम 2.5 का औसत स्तर 172 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस पूरी अवधि में नोएडा में सिर्फ पांच दिन और ग्रेटर नोएडा में सात दिन ही हवा संतोषजनक श्रेणी में रही।
निर्माण कार्य और वाहनों से बढ़ रहा प्रदूषण
विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य, वाहनों की बढ़ती संख्या, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण बढ़ा रही हैं। आरोप है कि अधिकारियों की ओर से भी इस दिशा में में पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। सड़क किनारे धूल और निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल के नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और सिटी बस सेवा की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।
प्रदूषण कम करने को विषेषज्ञों के सुझाव
प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए हैं। इनमें सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देना, निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल के नियमों का सख्ती से पालन, उद्योगों के लिए कड़े उत्सर्जन मानक तय करना और कचरा व पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाना शामिल है। इसके साथ ही शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार संभव हो सके।

