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ट्रेन में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमला, अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ केस

प्रयागराज जा रही ट्रेन में आशुतोष ब्रह्मचारी पर धारदार हथियारों से हमला। नाक काटने की कोशिश और हत्या की साजिश का आरोप, अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ केस।

ट्रेन में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमला, अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ केस
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प्रयागराज, आईएएनएस। आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में जानलेवा हमला किया गया है। उन्होंने आईएएनएस को बताया कि शाकुंभरी पीठ से प्रयागराज जाने के लिए हम लोग गाड़ियों से गाजियाबाद आए, क्योंकि टिकट हमारा गाजियाबाद से था। रीवा एक्सप्रेस ट्रेन से प्रयागराज जा रहा था। रविवार सुबह पांच बजे धारदार हथियारों से हमारे ऊपर हमला किया गया। हमारी नाक काटने की कोशिश की गई। बाथरूम में बैठकर हमने अपनी जान बचाई।

बोले- मुकदमा दर्ज कराने पर रखा गया था 21 लाख का ईनाम

आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो के तहत छोटे-छोटे बटुकों का जो मुकदमा दर्ज कराया था। उसी के बाद घोषणा की गई थी जो आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटकर लाएगा, उसको 21 लाख रुपए मिलेंगे। इसी साजिश के तहत मेरी हत्या की कोशिश की गई है। उन्होंने बताया कि मैंने अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद, अरविंद, प्रकाश और दिनेश शर्मा के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

21 फरवरी को अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला

बता दें कि 21 फरवरी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से ओर से दायर याचिका पर विशेष पोक्सो जज विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। अशुतोष ब्रह्मचारी ने यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अधिनियम की धारा 173(4) के तहत दायर किया था, जिसके तहत यह प्रावधान है कि यदि पुलिस अधिकारी शिकायत दर्ज करने से इंकार करता है, तो व्यक्ति मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकता है। ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बच्चों को पॉक्सो कोर्ट में पेश किया था और अदालत ने 13 फरवरी को आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा था। विशेष अदालत ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार की ओर से पेश की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एफआईआर दर्ज करने और आगे की जांच का निर्देश दिया था।

माघ मेले के दौरान विवादों में आए थे अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान महोत्सव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पारंपरिक पालकी यात्रा के माध्यम से संगम जाने का प्रयास कर रहे थे। प्रयागराज प्रशासन ने भारी भीड़ और 'नो-व्हीकल जोन' नीति का हवाला देते हुए इस यात्रा को रोका था। इसके बाद उनके शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कथित रूप से भोजन और जल का त्याग कर प्रशासन से माफी की मांग की थी।


Dhiraj Dhillon

Dhiraj Dhillon

धीरज ढिल्लों दो दशकों से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग की है। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ, उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी काम किया है। उनकी लेखनी में निष्पक्षता, तथ्यपरकता और गहरी विश्लेषण क्षमता स्पष्ट रूप से झलकती है। समसामयिक विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य, जीवनशैली, विकास संबंधी मुद्दों और राजनीति में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पांच वर्षों तक Centre for Advocacy & Research (CFAR) के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार कार्य किया है।

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