दुखद व मार्मिकः बीमारी और कर्ज से परेशान युवक ने खुद को गोली मारी
शाहजहांपुर के कांट थाना क्षेत्र के अजीजपुर जिगनेरा गांव में 35 वर्षीय सतीश वर्मा ने बीमारी और इलाज में बढ़ते कर्ज से परेशान होकर तमंचे से खुद को गोली मार ली।

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः जनपद के कांट थाना क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक घटना सामने आई है। बीमारी और उसके इलाज में बढ़ते कर्ज से परेशान एक युवक ने आखिरकार जिंदगी से हार मान ली। अजीजपुर जिगनेरा गांव निवासी 35 वर्षीय सतीश वर्मा ने बुधवार देर रात अपनी परचून की दुकान में तमंचे से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक का माहौल है। सतीश अपने पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।
तीन साल की बीमारी ने तोड़ दिया हौसला
परिजनों के मुताबिक सतीश पिछले तीन वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके ससुर सोनपाल ने बताया कि करीब तीन साल पहले सतीश के पित्त की थैली में तेज दर्द हुआ था, जिसके बाद उनका ऑपरेशन कराया गया।
ऑपरेशन के बाद शरीर में संक्रमण फैल गया और धीरे-धीरे उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई। बीमारी के कारण वह पहले की तरह काम नहीं कर पा रहे थे और घर की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती चली गई।
इलाज में 10 लाख खर्च, खेत भी गिरवी जैसे हालात
सतीश परिवार का मुख्य सहारा थे। वह गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान चलाकर पत्नी कीमत देवी, तीन बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण करते थे।
परिजनों के अनुसार: पिछले तीन वर्षों में इलाज पर करीब 10 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। परिवार के पास करीब 10 बीघा खेती है, जिस पर बैंक से लिया गया कर्ज भी इलाज में खर्च हो गया। दुकान की कमाई इतनी नहीं थी कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और महंगा इलाज एक साथ चल सके। आर्थिक दबाव और बीमारी ने सतीश को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था।
जेब से मिला भावुक संदेश
घटना के बाद परिजनों का कहना है कि सतीश की जेब से एक पर्चा मिला, जिसे सुसाइड नोट बताया जा रहा है। उसमें उन्होंने लिखा था कि वह अपने बच्चों को और परेशान नहीं देख सकते। बताया जा रहा है कि नोट में उन्होंने लिखा—
“हम अपने बच्चों को परेशान नहीं करना चाहते। मेरे इलाज में बहुत पैसा बर्बाद हो गया है, इसलिए हम गोली मार रहे हैं।”
यह पंक्तियाँ पढ़कर परिजन और गांव के लोग भावुक हो उठे।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला बीमारी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि सुसाइड नोट को लेकर पुलिस और परिजनों के दावों में अंतर सामने आया है।
परिजनों का कहना है कि जेब से सुसाइड नोट मिला है, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई लिखित नोट नहीं मिला है और मामले की जांच की जा रही है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सतीश अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी मौत के बाद पत्नी और चारों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक और संवेदना का माहौल है।
गांव के लोगों का कहना है कि सतीश स्वाभिमानी और मेहनती व्यक्ति थे, लेकिन बीमारी और कर्ज के बोझ ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
साइड स्टोरी : चार मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
सतीश वर्मा के परिवार में पत्नी और चार छोटे बच्चे हैं—तीन बेटियां और एक बेटा। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता अब पूरे परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। गांव के लोग प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं।
बीमारी और कर्ज: ग्रामीण परिवारों की बड़ी समस्या
ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर बीमारी अक्सर पूरे परिवार को आर्थिक संकट में धकेल देती है। महंगे इलाज, कम आय और कर्ज का दबाव कई परिवारों को मानसिक रूप से तोड़ देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और सामाजिक सहायता तंत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
गांव में पसरा मातम
घटना के बाद अजीजपुर जिगनेरा गांव में शोक का माहौल है। गुरुवार सुबह जब लोगों को घटना की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण सतीश के घर पहुंच गए। हर किसी की आंखें नम थीं और लोग बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताते नजर आए।


