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हृदय-केंद्रित जीवन-दृष्टि है सहज मार्ग साधना पद्धति : दाजी

- रामचंद्र मिशन आश्रम में बसंत उत्सव के पांचवें चरण में उमड़ी भारी भीड़, देश-विदेश के हजारों अभ्यासियों ने ध्यान कर विश्व शांति की कामना की

शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता। श्री रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य में रामचंद्र मिशन आश्रम में आयोजित बसंत उत्सव–2026 का पांचवां और अंतिम चरण आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के अद्भुत वातावरण में संपन्न हुआ। इस चरण में देश-विदेश से आए हजारों अभ्यासियों की उपस्थिति ने आश्रम परिसर को आध्यात्मिक आस्था के महासागर में परिवर्तित कर दिया।

प्रातःकाल उत्सव का शुभारंभ सामूहिक ध्यान साधना से हुआ। एकात्म भाव से ध्यान करते हुए साधकों ने मानव कल्याण और विश्व शांति की मंगल कामना की। आश्रम का वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना से आलोकित दिखाई दिया।

अपने प्रेरक संदेश में दाजी ने कहा कि पूर्वाग्रह अक्सर विवेक और समझदारी का चोला पहनकर हमारे सामने आता है। वह स्वयं को सत्य के प्रति निष्ठा और अनुभव से अर्जित बुद्धिमत्ता के रूप में प्रस्तुत करता है, किंतु वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति के लिए इन सीमाओं से ऊपर उठना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “आप सीमित दीवारें खड़ी करते हुए असीम तक नहीं पहुंच सकते। अलग रहने की जिद करते हुए परमात्मा में विलीन होना संभव नहीं है।”

दाजी ने स्पष्ट किया कि सहज मार्ग और हार्टफुलनेस मेडिटेशन केवल ध्यान की तकनीक नहीं, बल्कि हृदय-केंद्रित जीवन-दृष्टि है। यह साधना व्यक्ति को भीतर से परिष्कृत करती है और जीवन को प्रेम, संतुलन तथा आंतरिक शांति की दिशा में अग्रसर करती है।

सायंकालीन सत्र में भी भारी संख्या में अभ्यासियों ने ध्यान साधना में भाग लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित साधकों ने अनुशासन और एकाग्रता के साथ ध्यान कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

आयोजन की सफलता में सचिव उमाशंकर बाजपेई, संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल, कान्हा आश्रम प्रबंधक विनीत राणावत, माधो गोपाल अग्रवाल, ए.के. गर्ग, सुयश सिन्हा, राजगोपाल अग्रवाल, नीलम सेठ, संजय मिश्रा, ममता सिंह, विनोद श्रीवास्तव, राकेश सक्सेना, एस.के. शर्मा, कृष्णा भारद्वाज सहित अनेक स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।

बसंत उत्सव का यह चरण न केवल आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बना, बल्कि शाहजहांपुर को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने वाला भी सिद्ध हुआ।


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