टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का मशाल जुलूस, छूट की मांग
- शाहजहांपुर में यूटा के बैनर तले शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकालकर टीईटी अनिवार्यता का विरोध किया और आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग उठाई।
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाता। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के विरोध में सोमवार को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के बैनर तले शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। खिरनीबाग रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्रित हुए। इसके बाद जिलाध्यक्ष विनीत कुमार गंगवार और जिला महामंत्री हरिशंकर के नेतृत्व में शिक्षकों ने खिरनीबाग मैदान से शहीद पार्क तक मशाल जुलूस निकाला और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
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आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट की मांग
जिलाध्यक्ष विनीत कुमार गंगवार ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 29 जुलाई 2011 को लागू हुआ था। उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को अधिनियम में टीईटी से छूट दी गई थी, लेकिन अगस्त 2017 में केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश संशोधन कर सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया।
लाखों शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट
जिला महामंत्री हरिशंकर ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद देशभर के लगभग 25 लाख और प्रदेश में करीब दो लाख शिक्षकों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है, जिससे शिक्षक आंदोलित हैं।
सेवा के दौरान नए नियम लागू करना गलत
संयुक्त महामंत्री अवनीश कुमार सिंह ने कहा कि नियुक्ति के समय जो भी अहर्ताएं निर्धारित थीं, उसी आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। सेवा के दौरान नए नियम लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।
अनुभव को नजरअंदाज करना अनुचित
जिला सोशल मीडिया प्रभारी शिव सिंह ने कहा कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना उनकी योग्यता पर सवाल खड़ा करना है।
न्याय के लिए सड़क से अदालत तक लड़ाई
वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मसरूफ अली ने कहा कि संगठन शिक्षकों के न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ेगा और 20–25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को नौकरी से बाहर नहीं होने देगा।
बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
मशाल जुलूस में जिला उपाध्यक्ष चंदन वर्मा, दीपक कुमार पाल, जबर खान, संगठन मंत्री अमित यादव, जिला ऑडिटर जगपाल, जिला मंत्री राघवेंद्र कुशवाहा, जिला लेखाकार सोनपाल वर्मा, सह संगठन मंत्री राम अवतार सिंह, जैनेंद्र यादव सहित विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे।
साइड स्टोरी: क्या है टीईटी और क्यों हो रहा विरोध?
टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा, जिसे शिक्षकों की योग्यता परखने के लिए लागू किया गया है। हालांकि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को पहले छूट दी गई थी। 2017 में नियमों में संशोधन के बाद सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया, जिसके विरोध में देशभर में शिक्षक संगठन आंदोलन कर रहे हैं।



