धौनी से अख्तर तक कैसे बने गंभीर के फैन
टी-20 विश्व कप जीत के बाद गौतम गंभीर की टीम-फर्स्ट रणनीति, खिलाड़ियों पर भरोसा और साहसी चयन चर्चा में।

वाईबीएन डेस्क, नई दिल्ली।
भारतीय क्रिकेट में गौतम गंभीर का नाम हमेशा स्पष्ट विचारों, आक्रामक रवैये और टीम-फर्स्ट सोच के साथ जुड़ा रहा है। खिलाड़ी के रूप में भी और अब कोच के रूप में भी गंभीर ने बार-बार यह बात दोहराई है कि क्रिकेट में व्यक्तिगत रिकॉर्ड से अधिक महत्व टीम की जीत का होता है। हाल ही में टी-20 विश्व कप में भारत की जीत के बाद यही सोच चर्चा का केंद्र बन गई। दिलचस्प बात यह रही कि जिन रणनीतियों के लिए कभी गंभीर की आलोचना होती थी, वही रणनीतियाँ अब उनकी सफलता का कारण मानी जा रही हैं।
इस जीत के बाद कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने भी गंभीर की कोचिंग शैली की खुलकर तारीफ की। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी से लेकर पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख़्तर तक कई बड़े नामों ने गंभीर के नेतृत्व और सोच की सराहना की।
टी-20 विश्व कप जीत के बाद चर्चा में गंभीर
टी-20 विश्व कप के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम किया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 256 रन का बड़ा लक्ष्य रखा, जिसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 159 रन पर ऑलआउट हो गई। इस जीत के बाद भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर चर्चा के केंद्र में आ गए।
पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने सोशल मीडिया पर गंभीर की तस्वीर के साथ लिखा कि मुस्कान उन पर अच्छी लगती है और गंभीरता तथा मुस्कान का यह संयोजन बेहतरीन है। धौनी का यह संदेश खास इसलिए भी था क्योंकि लंबे समय से दोनों के रिश्तों को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं होती रही हैं।
गौतम गंभीर और महेंद्र सिंह धौनी दोनों ही 2011 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। उस फाइनल मैच में धौनी ने विजयी छक्का लगाया था, लेकिन गंभीर ने भी 97 रन की अहम पारी खेली थी।
गंभीर ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि भारत में हीरो कल्चर बहुत मजबूत है और किसी एक खिलाड़ी को पूरी जीत का श्रेय देना सही नहीं है। उनके मुताबिक, विश्व कप जैसी बड़ी जीत हमेशा पूरी टीम की मेहनत का परिणाम होती है।
इसी सोच को उन्होंने अपने कोचिंग कार्यकाल में भी जारी रखा है। गंभीर लगातार यह कहते रहे हैं कि व्यक्तिगत उपलब्धियों से अधिक महत्व ट्रॉफी का होता है।
टीम कल्चर पर जोर
टी-20 विश्व कप जीतने के बाद गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह जीत सिर्फ किसी एक व्यक्ति या योजना की नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सोच और विश्वास की जीत है।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में लंबे समय तक व्यक्तिगत उपलब्धियों पर ज्यादा ध्यान दिया गया, लेकिन उनकी कोशिश है कि टीम का फोकस सिर्फ जीत और ट्रॉफी पर रहे। गंभीर की यही सोच अब भारतीय टीम की नई पहचान बनती दिख रही है।
गौतम गंभीर की कोचिंग शैली का एक अहम पहलू खिलाड़ियों पर लगातार भरोसा बनाए रखना रहा है। कई बार खराब प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने खिलाड़ियों को टीम से बाहर नहीं किया।
उदाहरण के तौर पर अभिषेक शर्मा पूरे टूर्नामेंट में शुरुआत में संघर्ष कर रहे थे और शुरुआती मैचों में लगातार शून्य पर आउट हुए। इसके बावजूद गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने उन पर भरोसा बनाए रखा।फाइनल में अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 21 गेंदों में 52 रन बनाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैच के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि जब उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगा था तब भी टीम मैनेजमेंट ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
संजू सैमसन पर भरोसा
गौतम गंभीर की रणनीति का एक और बड़ा उदाहरण संजू सैमसन हैं। लंबे समय से टीम से बाहर रहे सैमसन को गंभीर ने फिर से टीम में मौका दिलाने की कोशिश की।
पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी एक टीवी शो में कहा कि भारतीय टीम की जीत दरअसल गंभीर की नीति और सिस्टम की जीत है। उनके अनुसार गंभीर ने खिलाड़ियों को असफलताओं के बाद भी मौका दिया और मेरिट के आधार पर फैसले किए।
शोएब अख्तर ने यह भी कहा कि सैमसन को टीम में वापस लाने के लिए गंभीर ने काफी प्रयास किए और यही विश्वास बाद में टीम के लिए फायदेमंद साबित हुआ।
गौतम गंभीर पर पहले यह आरोप लगाया जाता था कि वे टीम चयन में जरूरत से ज्यादा प्रयोग करते हैं। खासकर लेफ्ट-राइट बल्लेबाजों के संयोजन और ऑल-राउंडरों पर भरोसा करने को लेकर उनकी आलोचना होती थी।
लेकिन इस टूर्नामेंट में यही रणनीति टीम के लिए मजबूत साबित हुई। हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों ने अहम मौकों पर टीम के लिए योगदान दिया।
इसके अलावा अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और अक्षर पटेल जैसे लेफ्ट-हैंड बल्लेबाजों की मौजूदगी ने भारतीय बल्लेबाजी को संतुलन दिया।
पाकिस्तान के खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
भारतीय टीम की जीत के बाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने भी भारतीय टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत पूरे टूर्नामेंट में मजबूत टीम संयोजन के साथ खेला और उनकी बेंच स्ट्रेंथ भी बहुत मजबूत थी।
वहीं मोहम्मद हफीज़ ने कहा कि यह जीत भारतीय टीम के माइंडसेट और सिस्टम की जीत है। उनके अनुसार लगातार बड़े टूर्नामेंट जीतना इस बात का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का ढांचा मजबूत हो चुका है।
हालांकि गौतम गंभीर का कोचिंग कार्यकाल पूरी तरह आसान नहीं रहा। जब उन्होंने टीम की जिम्मेदारी संभाली, तब उन्हें राहुल द्रविड़ के सफल कार्यकाल के बाद टीम को आगे बढ़ाने की चुनौती मिली।
गंभीर के शुरुआती दौर में भारतीय टीम को कुछ बड़ी हारों का सामना करना पड़ा। न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज़ में भारत को 3-0 से हार मिली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी टीम को 1-3 से हार झेलनी पड़ी।
इसके अलावा श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज़ में भी भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
इन हारों के बाद कई पूर्व क्रिकेटरों ने गंभीर की रणनीति और टीम मैनेजमेंट की आलोचना की थी।
आलोचना से सफलता तक
पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने एक समय कहा था कि गंभीर को मीडिया के सामने टीम का प्रतिनिधित्व करने में सुधार की जरूरत है। वहीं रवि शास्त्री और कुछ विदेशी विशेषज्ञों ने भी उनके फैसलों पर सवाल उठाए थे।
लेकिन टी-20 विश्व कप की जीत के बाद यह तस्वीर बदलती दिख रही है। अब वही आलोचक गंभीर की रणनीति और टीम मैनेजमेंट की सराहना कर रहे हैं।
गंभीर ने भी जीत के बाद कहा कि भारतीय टीम की पहचान हमेशा बहादुरी रही है और खिलाड़ियों को हार के डर से मुक्त होकर खेलना होगा।
अब क्रिकेट के जानकार कह रहे हैं कि गौतम गंभीर की कोचिंग शैली भारतीय क्रिकेट में एक नए दृष्टिकोण को सामने ला रही है। उनका जोर व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बजाय टीम संस्कृति और सामूहिक प्रयास पर है। खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना, जोखिम लेने से न डरना और टीम संतुलन पर ध्यान देना उनकी रणनीति की खासियत रही है। टी-20 विश्व कप की जीत ने यह साबित कर दिया है कि गंभीर की सोच केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि मैदान पर परिणाम देने वाली रणनीति भी है।


