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रामायण रिसर्च काउंसिल को बड़ा झटका, ट्रस्टी आत्मानंद सिंह का निधन; महाकुंभ साहित्य निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका

रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी आत्मानंद सिंह का 78 वर्ष की उम्र में निधन। महाकुंभ पर बड़े साहित्य निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका।

रामायण रिसर्च काउंसिल को बड़ा झटका, ट्रस्टी आत्मानंद सिंह का निधन; महाकुंभ साहित्य निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका
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स्टेट ब्यूरो, पटना. पटना से एक दुखद खबर सामने आई है। आत्मानंद सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। वे 78 वर्ष के थे। उनका इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।

आत्मानंद सिंह मूल रूप से बिहार के मुंगेर जिले के घोषपुर गांव के रहने वाले थे। उनका परिवार सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों से जुड़ा रहा है। उनके पिता परमानंद सिंह स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे थे।

रामायण रिसर्च काउंसिल में आत्मानंद सिंह की भूमिका लंबे समय तक सक्रिय रही। वे संस्था के ट्रस्टी थे। काउंसिल के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में उनका योगदान दर्ज किया गया है।

हाल के समय में महाकुंभ से जुड़ा एक बड़ा साहित्य तैयार किया गया था। इस काम को काउंसिल का अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना गया। इस साहित्य के निर्माण में आत्मानंद सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने सामग्री संग्रह से लेकर लेखन तक में भाग लिया था।

काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने उनके निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि आत्मानंद सिंह संस्था के मजबूत स्तंभ थे। साहित्य और शोध से जुड़े कार्यों में वे लगातार सक्रिय रहते थे।

आत्मानंद सिंह को एक लेखक के रूप में भी जाना जाता था। वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर काम करते थे। काउंसिल के कई प्रकाशनों में उनका योगदान शामिल रहा है।

सीतामढ़ी में भी उनके काम की चर्चा रही। यहां मां सीता से जुड़े क्षेत्र के विकास को लेकर वे सक्रिय थे। राघोपुर बखरी स्थित श्रीराम जानकी स्थान के विकास की योजना पर वे काम कर रहे थे। यह भूमि बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा आवंटित की गई थी।

बताया गया है कि इस स्थान को एक विशेष धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। इसमें मंदिर निर्माण और नारी शक्ति केंद्र की स्थापना की योजना शामिल थी।

काउंसिल की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि जानकी नवमी के अवसर पर इस स्थल के विकास को लेकर आगे की योजना तय होनी थी। आत्मानंद सिंह इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

उनके निधन को संस्था के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। काउंसिल से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन की कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।


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