बिहार में इंजीनियर की संपत्ति पर बड़ा खुलासा, नेपाल कनेक्शन से बढ़ी जांच, रियल एस्टेट निवेश भी जांच के घेरे में
बिहार के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक की संपत्ति मामले में बड़ा खुलासा। नेपाल कनेक्शन और रियल एस्टेट निवेश की जांच तेज, विदेशी फंडिंग एंगल भी जांच के दायरे में।

स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार में एक सरकारी इंजीनियर की संपत्ति को लेकर जांच का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। मामला मधुबनी के जयनगर में तैनात विद्युत कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक से जुड़ा है। आर्थिक अपराध इकाई की जांच में कई नई जानकारियां सामने आई हैं। अब जांच एजेंसियां विदेशी फंडिंग के पहलू को भी खंगालने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान अभियंता के नेपाल में निवेश से जुड़े संकेत मिले हैं। सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद विदेश में संपत्ति और रिश्तेदारी का मामला सामने आने के बाद इसे गंभीर माना जा रहा है। इस वजह से केस का दायरा और बढ़ सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि मनोज कुमार रजक ने अपनी सेवा के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश किया। कई कंपनियों में पैसे लगाने के प्रमाण भी मिले हैं। इन दस्तावेजों की फिलहाल जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2009 में ऊर्जा विभाग में सहायक अभियंता के रूप में नौकरी शुरू की थी। पिछले करीब 17 वर्षों में उनकी पोस्टिंग सीमांचल के अलग-अलग जिलों में रही। अररिया, कटिहार, दरभंगा और मधुबनी जैसे इलाकों में वे लंबे समय तक तैनात रहे।
जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि इन जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे कई जमीन खरीदी गई। इन जमीनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया। कुछ जगहों पर गोदाम और अन्य ढांचे भी बनाए गए हैं।
अररिया में पदस्थापन के दौरान दो आवासीय भूखंड खरीदे गए। दरभंगा में रहने के दौरान भेलुचक इलाके में जमीन लेकर दो मंजिला मकान बनाया गया। हाल ही में इस घर का गृह प्रवेश भी किया गया था। दरभंगा शहर में अन्य प्लॉट की खरीद की भी जानकारी मिली है।
सुपौल जिले के करजाईन क्षेत्र में उनके पैतृक गांव में गैस एजेंसी भी संचालित होने की बात सामने आई है। इसके लिए बाजार में जमीन खरीदकर गोदाम और कार्यालय का निर्माण कराया गया। आसपास आवासीय मकान भी बनाए गए हैं।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सरकारी सेवा में आने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति सामान्य थी। इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए लिया गया कर्ज उन्होंने नौकरी मिलने के बाद चुकाया था।
पहले दर्ज प्राथमिकी में आय से अधिक करीब 1.20 करोड़ रुपये की संपत्ति का जिक्र था। लेकिन अब जांच एजेंसियां मान रही हैं कि वास्तविक संपत्ति इससे कहीं अधिक हो सकती है। दस्तावेजों की जांच के बाद पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
नेपाल कनेक्शन सामने आने के बाद एजेंसियां अब विदेशी फंडिंग की दिशा में भी जांच कर सकती हैं। बिना अनुमति विदेश यात्रा और वहां निवेश से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। इस मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


