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बिहार रास चुनाव: विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोप को लेकर विपक्ष और राजग आमने-सामने

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि विरोधी पक्ष अपने विधायकों को संभालने में विफल रहा।

बिहार रास चुनाव: विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोप को लेकर विपक्ष और राजग आमने-सामने
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। बिहार की पांच राज्यसभा सीट के लिए सोमवार को हुए चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मिली शत प्रतिशत जीत के बाद विपक्ष ने मंगलवार को विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ का आरोप लगाया और दलबदल विरोधी कानून की समीक्षा की मांग की। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि विरोधी पक्ष अपने विधायकों को संभालने में विफल रहा और मतदान के दौरान व्हिप जारी करने की मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।

राजनीतिक नैतिकता निम्नतम स्तर पर पहुंची

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक नैतिकता निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है। लोग अब उन राजनीतिक दलों का सम्मान नहीं करते जो उन्हें सदन में लाए हैं। दलबदल विरोधी कानून पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि हर चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आते हैं। जो कभी एक छिटपुट घटना होती थी अब यह व्यापक समस्या बन गई है।लालू प्रसाद यादव नीत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि राजग ने धनबल का इस्तेमाल करके जीत हासिल की।

भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप

उन्होंने कहा, न केवल तेजस्वी यादव, बल्कि पूरे देश ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। उन्होंने हरियाणा, ओडिशा, बिहार और अन्य राज्यों में भी ऐसा किया है। सिंह ने कहा, चुनाव बिना बहुमत के, धन बल का इस्तेमाल करके लड़े जा रहे हैं। विधायकों को तोड़ा जा रहा है। लोकतंत्र को इस तरह काम नहीं करना चाहिए। दल-बदल विरोधी कानून ठीक इसी तरह की कार्रवाइयों को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत कोई पार्टी तभी टूट सकती है जब उसके पास दो-तिहाई बहुमत हो।

कांग्रेस पार्टी ने तीन-पंक्ति वाला व्हिप जारी नहीं किया

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बिहार की पश्चिम चंपारण लोकसभा सीट से भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, कांग्रेस पार्टी ने तीन-पंक्ति वाला व्हिप जारी नहीं किया, जो मतदान के दौरान एक मानक प्रक्रिया है। राहुल गांधी कंबोडिया में छुट्टियां मना रहे थे, तेजस्वी यादव यूरोप में छुट्टियां मना रहे थे। इसका अभिप्राय है कि उनके नेता अन्य जगहों पर व्यस्त थे। वे व्हिप भी जारी नहीं कर सके और अब वे सवाल कर रहे हैं कि किसने किसे वोट दिया।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी व्हिप की अवहेलना करने पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी विधायक या सांसद को सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव को आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।

हारने के बाद कोई क्या कर सकता है?

उन्होंने कहा, तेजस्वी यादव को कुछ तो कहना ही होगा। हारने के बाद कोई क्या कर सकता है? उन्हें अपने घर को देखना चाहिए। आखिर वो अपने ही लोगों को क्यों नहीं संभाल पा रहे? अगर आप अपना घर नहीं संभाल सकते, तो दूसरों को दोष देना शुरू कर देते हैं।’’ ललन सिंह ने कहा, ‘‘उन्होंने अपने विधायकों को होटलों में कैद रखा था, और उसके बाद भी वे आरोप लगा रहे हैं। उन्हें आत्म मंथन करने की जरूरत है। बिहार की जनता अब उनके साथ नहीं है। लालू प्रसाद यादव का युग समाप्त हो गया है और उनका भी यही हाल होगा।

परिणाम राजग की एकजुटता को दर्शाते हैं

लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (लोजपा-रामविलास)के सांसद अरुण भारती ने कहा कि परिणाम राजग की एकजुटता को दर्शाते हैं। उन्होंने विपक्ष के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘हम बिहार के उन सभी राजग विधायकों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने मतदान करके हमारे उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित की। पहले जनता तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर भरोसा नहीं करती थी, अब तो उनके अपने विधायक भी अपने नेतृत्व पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।’’ भारती ने कहा, ‘‘उन्हें ईमानदारी से अपनी नेतृत्व क्षमता, योग्यता और विश्वसनीयता का आकलन करना चाहिए, जो अब गंभीर सवालों के घेरे में हैं।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार को बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। राजग ने राज्य की सभी पांच सीट पर जीत दर्ज की है। कुमार और नवीन के अलावा जदयू के नेता और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, भाजपा के शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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