केसी त्यागी ने JDU से बनाई दूरी, सदस्यता नहीं बढ़ाई, दिल्ली में होगी नई रणनीति पर बैठक
केसी त्यागी ने जदयू की सदस्यता नहीं बढ़ाई और पार्टी से दूरी बना ली। जानिए बिहार राजनीति में इस बड़े घटनाक्रम और आगे की रणनीति से जुड़ी पूरी खबर।

स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी अब पार्टी से अलग हो गए हैं। उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी है। यह घटनाक्रम राज्यसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के तुरंत बाद सामने आया है।
केसी त्यागी ने साफ किया कि उन्होंने इस बार पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। इसी के साथ उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी का सदस्यता अभियान पूरा हो चुका है और उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया। पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी के बीच दूरी की चर्चा चल रही थी। उनके बयानों को भी पार्टी स्तर पर ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा था। हालांकि अब तक उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया था। अब सदस्यता खत्म होने के साथ यह दूरी आधिकारिक रूप ले चुकी है।
केसी त्यागी ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि जदयू की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को हुई थी। उस समय समता पार्टी और जनता दल का विलय हुआ था। जॉर्ज फर्नांडिस पार्टी के अध्यक्ष थे और वे महासचिव के तौर पर उनके साथ काम कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने शरद यादव और नीतीश कुमार के नेतृत्व में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कहा कि वे पार्टी में मुख्य महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसे पदों पर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संगठन और विचारधारा दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।
पार्टी से अलग होने के बाद भी उन्होंने अपने सामाजिक सरोकारों को जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे वंचित वर्गों, किसानों और ग्रामीण समाज के मुद्दों पर पहले की तरह सक्रिय रहेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनका संबंध लगभग पांच दशक पुराना है। व्यक्तिगत स्तर पर उनके प्रति सम्मान पहले जैसा ही बना रहेगा।
आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर उन्होंने संकेत भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि 22 मार्च 2026 को नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में समान विचारधारा वाले लोगों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा होगी। इसके बाद आगे का रास्ता तय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे भी चौधरी चरण सिंह, डॉ. राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के विचारों से प्रेरित रहेंगे। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।


