NEET छात्रा मौत केस में बड़ा एक्शन, CBI ने बदला जांच अधिकारी; देरी और खामियों पर कोर्ट की सख्ती
पटना NEET छात्रा मौत केस में CBI ने जांच अधिकारी बदला। कोर्ट की सख्ती के बाद यह फैसला लिया गया। जांच में देरी और खामियों पर उठे कई सवाल।

स्टेट ब्यूरो, पटना. पटना और जहानाबाद से जुड़ा NEET छात्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जांच की धीमी रफ्तार और प्रक्रियागत गलतियों पर अब बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने केस के जांच अधिकारी को बदल दिया है।
अब इस मामले की जांच नई अधिकारी के हाथ में दी गई है। एएसपी पवन कुमार श्रीवास्तव की जगह डीएसपी विभा कुमारी को नया जांच अधिकारी बनाया गया है। यह बदलाव उस समय हुआ जब कोर्ट ने जांच को लेकर नाराजगी जताई थी।
यह मामला फरवरी में CBI को सौंपा गया था। 12 फरवरी से एजेंसी ने जांच शुरू की थी। लेकिन समय बीतने के बाद भी ठोस प्रगति नहीं दिखी। इसी पर पॉक्सो कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। इसके बाद जांच टीम में बदलाव किया गया।
नए जांच अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी मिलने के बाद विभा कुमारी अपनी टीम के साथ जहानाबाद पहुंचीं। वे छात्रा के घर गईं। यहां परिजनों और गांव के लोगों ने विरोध जताया। उनका कहना था कि बार-बार पूछताछ हो रही है। लेकिन नतीजा सामने नहीं आ रहा है।
इसी दौरान पूछताछ के वक्त छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ गई। वे बेहोश हो गईं। परिवार का आरोप है कि लगातार दबाव के कारण उनकी हालत खराब हुई है।
मामले में धमकी का एंगल भी सामने आया है। परिजनों को दो बार धमकी भरे पत्र मिले हैं। इसकी शिकायत स्थानीय थाने में की गई है। लेकिन अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जांच को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। केस दर्ज करते समय पॉक्सो एक्ट नहीं जोड़ा गया। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई। मुख्य आरोपी से रिमांड पर पूछताछ नहीं हुई। उसके मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच भी अधूरी बताई गई।
घटना के दिन आरोपी की लोकेशन साफ नहीं हो सकी है। CCTV फुटेज भी अभी तक जांच का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। परिवार के बयान भी कोर्ट में दर्ज नहीं कराए गए हैं। इन सभी बिंदुओं पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है।
छात्रा के दादा ने एजेंसी पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले को आत्महत्या बताने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि परिवार पहले ही सबूत दे चुका है।
परिजनों की ओर से कोर्ट में आवेदन भी दिया गया है। इसमें मुआवजा और शिकायत पर कार्रवाई की मांग की गई है। इस पर 23 मार्च को सुनवाई तय है।
परिवार की मांग है कि उनका बयान कोर्ट में दर्ज किया जाए। जांच रिपोर्ट की कॉपी दी जाए। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही उचित मुआवजा भी दिया जाए।


