पहले राउंड में 700 वोट पीछे, फिर भी जीत गए शिवेश राम, राज्यसभा चुनाव की गिनती ने पलटा पूरा खेल
बिहार राज्यसभा चुनाव में शिवेश राम ने पहली वरीयता में पीछे रहने के बावजूद दूसरी वरीयता के मतों से जीत दर्ज की। जानिए वोट गिनती का पूरा गणित।

स्टेट ब्यूरो, पटना. बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट पर हुआ मुकाबला अंत तक दिलचस्प बना रहा। पहले चरण की गिनती में पीछे रहने के बाद भी बीजेपी के शिवेश राम ने जीत दर्ज की। उन्होंने आरजेडी के अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह को दूसरे चरण की गिनती में हराया। विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की चार सीटें पहले से तय मानी जा रही थीं। असली मुकाबला पांचवीं सीट पर था। इसी सीट के लिए शिवेश राम और एडी सिंह आमने-सामने थे।
पहली वरीयता के मतों की गिनती में एडी सिंह आगे थे। उन्हें 3700 वोट मिले। वहीं शिवेश राम को 3000 वोट ही मिल सके। इस तरह वह करीब 700 वोट से पीछे थे। इसके बाद भी नतीजा उनके पक्ष में गया। इस चुनाव में जीत के लिए एक तय संख्या होती है। इसे कोटा कहा जाता है। बिहार में कुल 243 विधायक हैं। पांच सीटों के हिसाब से जीत का आंकड़ा 4051 तय हुआ था। लेकिन चार विधायकों के मतदान में शामिल नहीं होने से कुल वोट घट गए। इसके बाद कोटा भी बदलकर 3984 हो गया।
पहले राउंड में कोई भी उम्मीदवार पांचवीं सीट के लिए जरूरी कोटा हासिल नहीं कर पाया। ऐसे में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू हुई। यहीं से पूरा समीकरण बदल गया। एनडीए ने अपने विधायकों के वोट पहले से तय तरीके से बांटे थे। चार उम्मीदवारों को पहली वरीयता के पर्याप्त वोट दिलाए गए। बाकी विधायकों को निर्देश दिया गया कि वे दूसरी वरीयता का वोट शिवेश राम को दें। इस रणनीति का असर गिनती में साफ दिखा।
सबसे पहले उन उम्मीदवारों के वोट गिने गए जो पहले ही कोटा पार कर चुके थे। उनके अतिरिक्त वोटों की वैल्यू तय की गई। फिर उन मतपत्रों पर दर्ज दूसरी पसंद को जोड़ा गया। इन वोटों का फायदा सीधे शिवेश राम को मिला। नीतीश कुमार और नितिन नवीन को मिले वोटों की दूसरी वरीयता की गिनती हुई। इससे शिवेश राम के खाते में लगातार वोट जुड़ते गए। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा के मतों की दूसरी वरीयता जोड़ी गई। इस चरण में शिवेश राम का आंकड़ा कोटा के पार पहुंच गया।
अंत में शिवेश राम 4002 वोट तक पहुंच गए। जबकि जीत के लिए 3984 वोट ही जरूरी थे। इस तरह उन्होंने 302 वोट के अंतर से एडी सिंह को पीछे छोड़ दिया।
अगर सभी विधायक मतदान करते तो स्थिति अलग हो सकती थी। उस स्थिति में कोटा अधिक होता और पहली वरीयता में ही एडी सिंह जीत सकते थे। लेकिन चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से गणित बदल गया। इस चुनाव में वोटों की गिनती की प्रक्रिया ने निर्णायक भूमिका निभाई। पहली वरीयता में पिछड़ने के बावजूद दूसरी वरीयता के मतों ने परिणाम बदल दिया। इसी के साथ बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज कर ली।


