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टूटी नींद: पालम मेट्रो के पास अग्निकांड के बाद उपराज्यपाल ने व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए

ये निर्देश दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने की घटना के बाद दिए गए जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हुए हैं।

टूटी नींद: पालम मेट्रो के पास अग्निकांड के बाद उपराज्यपाल ने व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अपनी पहली बैठक की बुधवार को अध्यक्षता करते हुए पूरे शहर में व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए। ये निर्देश दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने की घटना के बाद दिए गए जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हुए हैं। पालम की घटना ने अग्निकांड से बचने और रोकथाम के उपाय पर्याप्त नहीं है।

व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए गए

उपराज्यपाल कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, आवासीय इमारत में आज आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर चर्चा की गई; ऐसी घटनाएं रोकने संबंधी कदमों को मजबूत करने के लिए इलाकों और संस्थानों में व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी इस उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुईं, जिसमें शहरी जलभराव और शहर में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की उपलब्धता जैसे अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। गुप्ता ने आग लगने की घटना की मजिस्ट्रेट से जांच कराए जाने के भी आदेश दिए हैं।

दिल्ली में जलनिकासी योजना की समीक्षा की गई

पोस्ट में कहा गया, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्रिय आपदा जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण के अनुरूप शहरी जलभराव कम करने के उपायों और दिल्ली में जलनिकासी योजना की समीक्षा की गई। उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि संधू ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के बीच एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता की भी समीक्षा की। कागजों पर और आधुनिक उपकरणों की खरीद के मामले में दिल्ली में पहले से बेहतर हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत (विशेषकर मैनपावर की भारी कमी और संकरे इलाकों में पहुँच) अभी भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। पालम जैसी हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि केवल साधन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समय पर और कुशलता से संचालित होना जीवन बचाने के लिए अनिवार्य है।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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