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रियल एस्टेट फ्रॉड पर ईडी का बड़ा एक्शन, गुरुग्राम में अंसल हब-83 प्रोजेक्ट की संपत्ति अटैच की

यह प्रोजेक्ट करीब 19 कनाल 15 मरला (लगभग 2.47 एकड़) जमीन पर फैला है, जिसमें 147 कमर्शियल दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और 2 रेस्टोरेंट यूनिट शामिल हैं।

रियल एस्टेट फ्रॉड पर ईडी का बड़ा एक्शन, गुरुग्राम में अंसल हब-83 प्रोजेक्ट की संपत्ति अटैच की
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गुरुग्राम,आईएएनएस। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत सेक्टर-83 स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट 'अंसल हब-83' से जुड़े बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट फ्रॉड के मामले में लगभग 82 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच कर लिया है। यह प्रोजेक्ट करीब 19 कनाल 15 मरला (लगभग 2.47 एकड़) जमीन पर फैला है, जिसमें 147 कमर्शियल दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और 2 रेस्टोरेंट यूनिट शामिल हैं।

आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल

ईडी की जांच हरियाणा पुलिस द्वारा जून 2023 में दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी की धाराओं 120-बी, 406 और 420 के तहत मेसर्स अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पहले अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटर्स और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसमें फुल टाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल तथा जुड़ी कंपनियां मेसर्स सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। यह मामला 'अंसल हब-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन' की शिकायत पर शुरू हुआ, जो एक हजार से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है। निवेशकों ने झूठे वादों और गुमराह करने वाली बातों पर अपनी मेहनत की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई थी।

मंजूरी मिलने से पहले ही य़ूनिट्स बेचीं

जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया और वैध कानूनी मंजूरी मिलने से पहले ही कमर्शियल यूनिट्स निवेशकों को बेच दी गईं। प्रोजेक्ट का लाइसेंस दिसंबर 2015 में समाप्त हो गया था, लेकिन डेवलपर्स ने इसे रिन्यू कराए बिना सितंबर 2023 तक पैसे इकट्ठा करना और यूनिट्स बेचना जारी रखा। कई निवेशकों ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (एचआरईआरए) से भी शिकायत की थी, जिसमें पजेशन में देरी, प्रोजेक्ट पूरा न होना, गैर-कानूनी फंड जुटाना और डेवलपर द्वारा जिम्मेदारियों के उल्लंघन के आरोप थे। निवेशकों को समय पर पजेशन और विश्व-स्तरीय सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 साल बीत जाने के बाद भी कोई ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ और न ही पजेशन दिया गया।

निर्दोष अलॉटीज से 82 करोड़ रुपए से अधिक रकम इकट्ठा की

ईडी ने पाया कि 2011 से 2023 तक निर्दोष अलॉटीज से 82 करोड़ रुपए से अधिक रकम इकट्ठा की गई, लेकिन फंड का इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय अन्य कार्यों और निजी फायदे के लिए किया गया। प्रोजेक्ट की जमीन और अब तक हुए निर्माण को प्रोविजनली अटैच कर दिया गया है, ताकि संपत्तियों का कोई ट्रांसफर, बिक्री या डिस्पोजल न हो सके और पीएमएलए के तहत भविष्य में जब्ती की कार्रवाई प्रभावित न हो।


Mukesh Pandit

Mukesh Pandit

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1989 में अमर उजाला से रिपोर्टिंग से करने वाले मुकेश पंडित का जनसरोकार और वास्तविकत पत्रकारिता का सफर सतत जारी है। उन्होंने अमर उजाला, विश्व मानव, हरिभूमि, एनबीटी एवं दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक अपनी सेवाएं दीं हैं। समाचार लेखन, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में निपुणता के साथ-साथ उन्होंने समय के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को भी बख़ूबी अपनाया है। करीब 35 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ मुकेश पंडित आज भी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनहित, राष्ट्रहित और समाज की सच्ची आवाज़ बनने के मिशन पर अग्रसर हैं।

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