IDFC बैंक घोटाला: मैनेजर समेत 4 गिरफ्तार, ऋषि का आदर्श है हर्षद मेहता
हरियाणा में 583 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में ACB ने AU स्मॉल फाईनेंस बैंक के मैनेजर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ऋषि का आदर्श है हर्षद मेहता

चंडीगढ़, वाईबीएन न्यूज। हरियाणा में 583 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने मंगलवार देर रात एयू स्मॉल फाईनेंस बैंक की जीरकपुर शाखा के मैनेजर रिभव ऋषि समेत चार गिरफ्तारियां की हैं। घोटाले के लिए गठित एसआईटी प्रमुख डीएसपी शुक्रपाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मैनेजर रिभव ऋषि इस पूरे घोटाले का मास्टर माइंड माना जा रहा है। वह हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानता था और उसी अंदाज में रातोंरात अरबपति होने के सपने देखता था। गिरफ्तारी के बाद देर रात सभी आरोपियों का पंचकूला के सिविल अस्पताल में मेडिकल कराया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के बारे में जानिए
एसीबी ने जीरकपुर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के मैनेजर पंचकूला निवासी रिभव ऋषि के साथ उसके साथी अभय कुमार, चंडीगढ़ निवासी फर्म डायरेक्टर अभिषेक सिंगला और स्वाति सिंगला को गिरफ्तार किया है। स्वाति सिंगला अभय कुमार की बहन है और अभिषेक सिंगला उसका पति। जांच एजेंसी को शुरूआती जांच में आरोपी पर शक हो गया था। शक होने पर मोहाली और जीरकपुर समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पहले आईडीएफसी में मैनेजर था मास्टर माइंड
इस घोटाले का मास्टर मांइड रिभव ऋषि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को ज्वाइन करने से पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में ही चंडीगढ़ ब्रांच का मैनेजर था। सूत्रों का कहना है कि रिभव ऋषि ने हरियाणा सरकार में कुछ बड़े अधिकारियों पहुंच बना रखी थी। उसने अपने दोस्त अभय कुमार के साथ मिलकर सरकार धन के गबन की योजना बनाई थी। रिभव के कहने पर अभय कुमार ने इस साजिश में अपनी बहन और बहनाई को भी शामिल कर लिया था।
फर्जी फर्म बनाकर दिया घोटाले को अंजाम
रिभव ऋषि ने अभय कुमार, उसकी बहन स्वाति सिंगला और बहनोई अभिषेक सिंगला के साथ मिलकर पूरी योजना तैयार की और फिर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के नाम से एक फर्जी फर्म बना ली। आरोपियों ने इसी फर्जी फर्म के खाते में रकम ट्रांसफर कर सरकारी पैसे का गबन कर लिया।
अमीर बनने की चाह ने सलाखों के पीछे पहुंचाया
सूत्रों के मुताबिक एसीबी की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जल्दी अमीर बनने की चाह में उन्होंने पूरी योजना बनाई थी। रिभव ऋषि हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानता था और उसी के नक्शे कदम पर चलकर रिभव ने सरकारी धन के गबन की योजना बनाई और फिर अन्य लोगों के साथ मिलकर इसे अंजाम भी दे डाला।
जानिए हरियाणा सरकार ने मामले में क्या कहा?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि घोटाले का पूरा पैसा 24 घंटे में वापस आ गया है। बैंक ने ब्याज समेत पूरी राशि लौटा दी है। हरियाणा सरकार के अनुसार 556 करोड़ से अधिक की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने वापस खातों में जमा करा दी है हालांकि बैंक ने 583 करोड़ रुपये लौटाने का दावा किया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए वित्त सचिव अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। यह समिति ने केवल जिम्मेदारी तय करेगी बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुझाव भी देगी। सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा है कि घोटाले में शामिल किसी भी सरकारी अधिकारी- कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

