अंबा प्रसाद ने विस्थापितों के संघर्ष पर बीजेपी को घेरा, आंदोलन जारी रहने का दावा
विस्थापितों की जमीन और अधिकारों को लेकर राजनीति गर्म

रांची, वाईबीएन डेस्क :बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने विस्थापित लोगों के हितों को लेकर बीजेपी नेताओं पर तीखा हमला किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सांसद और विधायक केवल सामूहिक विवाहों में सक्रिय रहकर विस्थापितों के वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं। अंबा प्रसाद ने कहा कि बीजेपी विधायक वही बातें दोहरा रहे हैं जो उनके माता-पिता पिछले 15 सालों से कह रहे थे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके माता-पिता ने लंबे समय तक आंदोलन किया और सच बोलते रहे, जबकि कांग्रेस नेता के रूप में उन्होंने हमेशा सही मुद्दे उठाए।
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशों का आरोप
अंबा प्रसाद ने जिला प्रशासन और संबंधित कंपनियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने विस्थापितों के संघर्ष को दबाने की कोशिश की। उनका कहना था कि उनके माता-पिता का नाम एफआईआर में होने के बावजूद उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि अन्य रैयतों को जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आंदोलन केवल उनके परिवार के लिए है। उन्होंने कहा, “बड़कागांव के लोग समझदार हैं और जानते हैं कि आंदोलन को कैसे कमजोर किया जा रहा है। हम किसी के दबाव में नहीं आएंगे और अपने संघर्ष को जारी रखेंगे।”
बीजेपी का पलटवार और विवाद
बड़कागांव से बीजेपी विधायक रोशन लाल चौधरी ने अंबा प्रसाद और कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी को रिहा करने के लिए प्रशासन पर दबाव डाला गया, जबकि अन्य गरीब और कमजोर लोगों को जेल में रखा गया। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस परिवार ने 15 साल तक विस्थापितों को गुमराह किया और आंदोलन के नाम पर झूठी गिरफ्तारी करवाई। उन्होंने सवाल किया कि अगर सभी एक ही आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे, तो बाकी लोगों को जेल क्यों भेजा गया और कुछ को रिहा कैसे किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए।
अंबा प्रसाद ने साफ किया कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का पालन कराना उनका अधिकार है और इस आंदोलन को कोई कमजोर नहीं कर सकता। उनका कहना है कि जमीन और विस्थापितों के मुद्दे पर उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा और क्षेत्र के लोग उनके आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।


