रामनवमी डीजे विवाद पर झारखंड विधानसभा में टकराव, बीजेपी विधायकों का जोरदार प्रदर्शन
हजारीबाग में डीजे प्रतिबंध के खिलाफ बीजेपी विधायकों का हंगामा, सरकार पर पक्षपात के आरोप

रांची वाईबीएन डेस्क :झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सियासी माहौल काफी गरम रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर का पोर्टिको राजनीतिक और धार्मिक नारों से गूंज उठा। भाजपा और आजसू के विधायकों ने भगवान श्रीराम की तस्वीरें हाथ में लेकर जोरदार नारेबाजी की और राज्य सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान विपक्षी विधायकों ने हजारीबाग जिले में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को मुद्दा बनाते हुए प्रदर्शन किया।
विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासनिक निर्णय का विरोध जताया और आरोप लगाया कि यह फैसला एक खास वर्ग को ध्यान में रखकर लिया गया है। उनका कहना था कि इस तरह के प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता और पारंपरिक आयोजनों में बाधा उत्पन्न करते हैं। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी देर तक गरम रहा और सत्ता पक्ष के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए।
प्रशासनिक फैसले पर विपक्ष का विरोध
भाजपा और आजसू के नेताओं ने हजारीबाग के बड़कागांव क्षेत्र के महूदी गांव में डीजे पर लगी रोक को अनुचित बताया। उनका कहना था कि वर्षों से रामनवमी के अवसर पर जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते आए हैं, लेकिन इस बार प्रशासन ने बिना ठोस कारण के पाबंदी लगा दी है। भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यह फैसला जनता की भावनाओं के खिलाफ है और लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि परंपराओं के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
सदन के भीतर भी गूंजेगा मुद्दा
विधायक प्रदीप प्रसाद ने यह भी कहा कि वे इस मामले को विधानसभा के अंदर जोर-शोर से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता की आस्था और धार्मिक आयोजनों से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। विपक्षी विधायकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। कुछ विधायकों ने सुझाव दिया कि सरकार को रामनवमी के अवसर पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए, जिससे समाज में सौहार्द बना रहे।
‘संवेदनशील क्षेत्र’ के नाम पर सियासत तेज
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महूदी इलाके को संवेदनशील घोषित करने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र में समस्या है तो प्रशासन को असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, न कि धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की नीतियों के कारण ही ऐसे इलाकों को बार-बार संवेदनशील बताया जाता है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से मंत्री इरफान अंसारी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि रामनवमी मनाने पर किसी तरह की रोक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो न्यायालय के निर्देशों और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जनप्रतिनिधि बिना पूरी जानकारी के लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं, जो सही नहीं है।
मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि माहौल खराब करने या लोगों को उकसाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नए विधायकों को संसदीय परंपराओं और नियमों की बेहतर जानकारी देने के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि रामनवमी जैसे धार्मिक मुद्दे पर भी राज्य की राजनीति गर्म हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है।


