JETET विवाद पर गरमाया सदन, अभ्यर्थियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार-विपक्ष में तीखी टक्कर
लाठीचार्ज के मुद्दे पर उठा बवाल, सरकार ने दी सफाई तो विपक्ष ने घेरा

रांची वाईबीएन डेस्क : झारखंड विधानसभा बजट सत्र के दौरान एक बार फिर युवाओं से जुड़ा मुद्दा सदन में गूंज उठा। बजट सत्र के 17वें दिन झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JETET) को लेकर जमकर हंगामा देखने को मिला। ध्यानाकर्षण शुरू होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष ने अभ्यर्थियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे, तो फिर उन पर बल प्रयोग क्यों किया गया।
बताया गया कि इस घटना में कई अभ्यर्थियों को चोटें आई हैं, जिनमें बबलू महतो और रवि रौशन जैसे छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। विपक्ष ने इसे युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
सदन में सरकार-विपक्ष आमने-सामने
इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य के युवा लंबे समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने लाठीचार्ज को पूरी तरह अनुचित करार देते हुए इसकी जांच की मांग की।
वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और सभी प्रक्रियाएं तय समय के भीतर पूरी की जा रही हैं। बहस के दौरान कई बार माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप हुए।
सरकार की सफाई और पुरानी सरकार पर आरोप
मामले पर जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि JETET से जुड़े मामलों पर उच्च न्यायालय ने 31 मार्च तक का समय दिया है और सरकार उसी के अनुसार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया को दुरुस्त करने में समय लगता है और इसमें जल्दबाजी संभव नहीं है।
मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2014 से 2019 के बीच कई परीक्षाएं समय पर नहीं हो सकीं, जिसकी वजह से आज यह स्थिति बनी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार व्यवस्था को सुधारने में जुटी हुई है।
युवाओं की उम्मीदें और बढ़ता असंतोष
JETET परीक्षा को लेकर राज्य के हजारों अभ्यर्थियों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। रोजगार की उम्मीद में तैयारी कर रहे युवाओं को बार-बार निराशा हाथ लग रही है। ऐसे में सड़क से लेकर सदन तक यह मुद्दा लगातार उठ रहा है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद का समाधान कैसे निकालती है और अभ्यर्थियों को कब तक राहत मिलती है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


