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झारखंड बजट सत्र का समापन: तय समय से ज्यादा काम, बड़े फैसलों पर लगी मुहर

17 दिन तक चले सत्र में बढ़ी कार्यक्षमता, जनमुद्दों पर चर्चा और बड़े वित्तीय फैसले

Manish Jha
झारखंड बजट सत्र का समापन: तय समय से ज्यादा काम, बड़े फैसलों पर लगी मुहर
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रांची वाईबीएन डेस्क : झारखंड विधानसभा का हालिया बजट सत्र कई मायनों में उल्लेखनीय रहा। करीब एक महीने तक चले इस सत्र में विधायकों की भागीदारी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा प्रमुख रही। सदन में अल्पसूचित और तारांकित प्रश्नों की अच्छी संख्या दर्ज की गई, जिससे यह साफ हुआ कि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे।

ध्यानाकर्षण सूचनाओं और शून्यकाल के जरिए भी कई अहम मुद्दे उठाए गए, जिन पर सरकार की ओर से जवाब दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने समापन के दौरान कहा कि यह सत्र जन सरोकारों को प्राथमिकता देने का उदाहरण बना है।

तय समय से ज्यादा काम, बजट और विधेयकों पर मुहर

इस बार सदन की कार्यवाही तय समय से अधिक चली, जो अपने आप में एक उपलब्धि मानी जा रही है। निर्धारित समय के मुकाबले ज्यादा घंटे काम करते हुए विधानसभा ने कार्यक्षमता का नया उदाहरण पेश किया।

सत्र के दौरान राज्य के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। आगामी वित्तीय वर्ष का बजट पारित होने के साथ-साथ अनुपूरक बजट को भी स्वीकृति मिली। कुल बजट आकार काफी बड़ा रखा गया है, जिससे विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसके अलावा झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 को भी पारित किया गया। इस कानून के जरिए उच्च शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने और संस्थानों के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

तकनीक का सहारा और सियासी तकरार दोनों दिखे

सत्र के दौरान डिजिटल व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया। NEVA (ई-विधान) प्रणाली के जरिए विधायकों ने कई सूचनाएं ऑनलाइन भेजीं, जिससे प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी बनी। कार्यसूची भी समय से पहले पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई, जिससे सदस्यों को तैयारी में सुविधा मिली।

हालांकि, पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तकरार भी जारी रही। विपक्ष ने सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे बेबुनियाद बताया।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सत्र को शांतिपूर्ण और फलदायी बताया, वहीं विपक्षी नेताओं ने कार्यवाही की अवधि बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।


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