होर्मुज में फंसे जहाज पर रांची के कैप्टन की मौत, देर से इलाज बना जानलेवा
समुद्र में फंसे जहाज पर बिगड़ी तबीयत, एयर एंबुलेंस न मिलने से नहीं बच सकी जान—परिवार ने उठाए सवाल

रांची वाईबीएन डेस्क : रांची के रहने वाले मर्चेंट नेवी के अनुभवी शिप कैप्टन राकेश रंजन सिंह का विदेश में निधन हो गया। वह उस वक्त ड्यूटी पर तैनात थे, जब उनका जहाज पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में फंसा हुआ था। शुरुआती जानकारी में हार्ट अटैक से मौत की बात सामने आई है, लेकिन परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना के बाद रांची स्थित उनके घर में शोक का माहौल है और परिवार गहरे सदमे में है।
ड्यूटी पर गए, लेकिन हालात ने बदल दी कहानी
जानकारी के मुताबिक, कैप्टन राकेश रंजन सिंह कुछ समय पहले ही छुट्टी खत्म कर अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। वह 2 फरवरी को रांची से दुबई पहुंचे और इसके बाद ‘अवाना’ नाम के जहाज को ज्वाइन किया। जहाज को तेल लोड करने के लिए होर्मुज जलसंधि के पास जाना था।
तेल लोडिंग के बाद जहाज भारत के लिए रवाना हुआ, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण उसे बीच समुद्र में ही रोक दिया गया। दुबई के करीब समुद्री क्षेत्र में जहाज को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर लगातार तनावपूर्ण स्थिति में काम कर रहे थे।
तबीयत बिगड़ी, लेकिन समय पर नहीं मिल सकी मदद
जहाज पर कैप्टन राकेश के साथ दर्जनों अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे। लंबे समय तक समुद्र में फंसे रहने और अनिश्चित माहौल का असर स्वास्थ्य पर पड़ा।
बताया जा रहा है कि 18 मार्च को अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। स्थिति गंभीर होते देख जहाज के अधिकारियों ने तत्काल मेडिकल सहायता के लिए संपर्क किया और एयर एंबुलेंस की मांग की।
हालांकि, उस क्षेत्र में चल रहे तनाव और सुरक्षा कारणों से एयर एंबुलेंस को अनुमति नहीं मिल सकी। ऐसे में उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना संभव नहीं हो पाया और यही देरी उनकी हालत को और गंभीर बना गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले मौत, परिवार ने मांगी पूरी जानकारी
एयर एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलने के बाद उन्हें बोट के जरिए तट तक लाया गया। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लग गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।
फिलहाल उनका शव दुबई के शेख राशिद अस्पताल में रखा गया है और भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
कैप्टन राकेश रांची के अरगोड़ा इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे और मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के निवासी थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।
परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक मौत की परिस्थितियों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में वे पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं। इस घटना के बाद परिवार में शोक के साथ-साथ अनिश्चितता भी बनी हुई है।


