Hospital Referral Scam: धन लेकर प्राइवेट अस्पतालों को रेफर किए जाते थे सरकारी अस्पताल से मरीज
नोएडा, एटा, फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद में विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद हुए।

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के एटा स्थित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत सेना के सेवानिवृत्त मेजर और नोएडा स्थित फेलिक्स अस्पताल के एक अधिकारी को तीन लाख रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया है। चिकित्सा अधिकारी भारी रकम लेकर सरकार अस्पतालों से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने एटा के ईसीएचएस (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) पॉलीक्लिनिक में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात मेजर आशीष शाक्य (सेवानिवृत्त) और फेलिक्स अस्पताल के बिजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने बिछाया जाल
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, जाल बिछाकर की गई कार्रवाई के दौरान निजी अस्पताल के आरोपी प्रतिनिधि द्वारा सरकारी अधिकारी को दी गई तीन लाख रुपये की रिश्वत बरामद की गई। दोनों आरोपियों को 15.03.2026 को गिरफ्तार किया गया है। नोएडा, एटा, फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद में विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद हुए।
मरीजों को निजी अस्पताल में रेफर किया
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक शाक्य ने ईसीएचएस के तहत सूचीबद्ध फेलिक्स अस्पताल (फेलिक्स हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के रूप में निगमित) के सुमित गुप्ता, रोहित अग्रवाल और बिजेंद्र सिंह के साथ आपराधिक साजिश रची और बिना किसी स्पष्ट चिकित्सा आवश्यकता के मरीजों को निजी अस्पताल में रेफर किया। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि शाक्य इस तरह के मरीजों को रेफर करने के बदले में रिश्वत मांगता था।
10 मरीजों को फेलिक्स अस्पताल, नोएडा रेफर किया था
प्राथमिकी के मुताबिक, यह सूचना मिली कि 11 मार्च, 2026 को डॉ. आशीष शाक्य ने सुमित गुप्ता को सूचित किया कि उन्होंने होली (यानी 04.03.2026) के बाद लगभग 10 मरीजों को फेलिक्स अस्पताल, नोएडा रेफर किया था और रिश्वत की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की।’’ प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि शाक्य ने गुप्ता को 14 मार्च को नोएडा में मिलने और लंबित रिश्वत का भुगतान करने को कहा। उसने दलील दी कि उसे यह रकम अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा करनी है और अन्य निचले स्तर के अधिकारियों में वितरित करनी है।


