हाथों की उंगलियों में छिपा है पंचतत्वों का संतुलन, जानें सक्रिय करने के आसान तरीके
यह बात तो सभी जानते हैं कि हमारा शरीर पंचभूतों से मिला है, जिसमें धरती, आकाश, जल, अग्नि और वायु सम्मिलित हैं। यह पंचभूत हमारे शरीर में विद्यमान है और माना जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है।

नई दिल्ली। सनातन दर्शन के अनुसार मानव शरीर पंचमहाभूत-धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश-से बना माना जाता है। योग और आयुर्वेद में हाथों की पांचों उंगलियों को इन तत्वों का प्रतिनिधि बताया गया है। अलग-अलग हस्त मुद्रा बनाकर इन तत्वों के संतुलन को सक्रिय किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है, मन शांत होता है और स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही मुद्रा अभ्यास से शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
पंचभूतों से मिला शरीर
यह बात तो सभी जानते हैं कि हमारा शरीर पंचभूतों से मिला है, जिसमें धरती, आकाश, जल, अग्नि और वायु सम्मिलित हैं। यह पंचभूत हमारे शरीर में विद्यमान है और माना जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है। इन पंचतत्वों को हमारे शरीर में संतुलन और सक्रिय रखना भी बहुत जरूरी है क्योंकि उनके तार हमारी सेहत से जुड़े हैं। हमारे हाथ की पांचों उंगुलियां शरीर के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा पृथ्वी तत्व, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका अग्नि और कनिष्ठा जल का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन पंचतत्वों का सक्रिय होना भी जरूरी है।
पृथ्वी तत्व
पहले बात करते हैं पृथ्वी तत्व की। पृथ्वी तत्व को सक्रिय करने प्रकृति से जुड़ना बहुत जरूरी है। इसके लिए कोशिश करें कि हरियाली के साथ समय बिताए। इसके साथ नंगे पैर घास पर चलना, मिट्टी को हाथ लगाना, और बागवानी करना पृथ्वी तत्व को सक्रिय कर सकता है। वहीं वायु तत्व को सक्रिय करने के लिए सांस से जुड़े प्राणायाम करें। इसके लिए रोजाना खुली हवा में बैठकर अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। इसके साथ ही आहार में कड़वी चीजों को शामिल करें।
आकाश तत्व
आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए ध्यान और मौन दोनों की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। इसके लिए ध्यान की मुद्रा में बैठकर ओम का उच्चारण करें। इससे मानसिक चेतना में वृद्धि होती है और मन को भी शांति मिलती है। वहीं अग्नि तत्व पाचन से जुड़ा है। इसको सक्रिय करने के लिए पेट से जुड़े योग करें, जैसे सूर्य नमस्कार, नौकासन और कपालभाति। इसके साथ ही हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें। अगर शरीर में पाचन क्रिया सही है तो शरीर के आधे रोग अपने आप ही ठीक हो जाते हैं।
जल तत्व
पांचवा और आखिरी है जल तत्व। जल तत्व हमारे शरीर का सबसे जरूरी भाग है क्योंकि हमारे शरीर का 50-65 फीसदी हिस्सा पानी से बना है। जल तत्व को सक्रिय करने के लिए खूब सारा तरल लेना फायदेमंद होता है और साथ ही जल मुद्रा का अध्ययन करना भी प्रभावी होता है। इसके साथ ही स्विमिंग करने से भी जल तत्व सक्रिय होता है।


