Top
Begin typing your search above and press return to search.

ऊर्ध्व मुख श्वानासन: शरीर को लचीला बनाने और रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने वाला एक दिव्य योगाभ्यास

ऊर्ध्व मुख श्वानासन योग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जो शरीर को लचीला और मजबूत बनाने में मदद करता है। इस आसन में शरीर को पेट के बल रखते हुए हाथों के सहारे ऊपर उठाया जाता है और छाती को आगे की ओर फैलाया जाता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

Priti Jha
ऊर्ध्व मुख श्वानासन: शरीर को लचीला बनाने और रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने वाला एक दिव्य योगाभ्यास
X

नई दिल्ली। ऊर्ध्व मुख श्वानासन योग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जो शरीर को लचीला और मजबूत बनाने में मदद करता है। इस आसन में शरीर को पेट के बल रखते हुए हाथों के सहारे ऊपर उठाया जाता है और छाती को आगे की ओर फैलाया जाता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, कंधों और बाजुओं में ताकत आती है तथा तनाव कम करने में भी सहायता मिलती है। यह आसन शरीर की ऊर्जा बढ़ाकर मन को शांत और संतुलित रखने में मदद करता है।

योग में कुछ ऐसे आसन होते हैं, जो शरीर को शक्ति और लचीलापन प्रदान करते हैं। 'ऊर्ध्व मुख श्वानासन' उन्हीं में से एक प्रभावशाली योगासन है, जिसके नियमित तौर पर करने से शरीर में स्फूर्ति और ऊर्जा का संचार होता है।

'ऊर्ध्व मुख श्वानासन' एक संस्कृत शब्द है। इसे आम बोलचाल की भाषा में 'अपवर्ड फेसिंग डॉग पोज' भी कहते हैं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और छाती और फेफड़ों को फैलाता है। नियमित अभ्यास से पीठ, कंधों और भुजाओं की ताकत बढ़ती है और मानसिक तनाव भी कम होता है।

यह आसन सूर्य नमस्कार का प्रमुख हिस्सा है। यह सूर्य नमस्कार के 7वें चरण (भुजंगासन के स्थान पर या उसके बाद) में किया जाता है, जो अष्टांग नमस्कार के बाद आता है। यह शरीर के सामने के हिस्से को स्ट्रेच करता है और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह छाती को खोलता है और कमर की मजबूती के लिए जाना जाता है।

आयुष मंत्रालय ने इसके महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने इसे रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन बताया है। उनके अनुसार, इसके अभ्यास से थकान कम होती है और रीढ़, बांहें व कंधे मजबूत बनते हैं। साथ ही, यह पाचन क्रिया को सुधारने और दमा में भी लाभकारी माना जाता है।

'ऊर्ध्व मुख श्वानासन' के नियमित अभ्यास मात्र से पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और कंधों में लचीलापन आता है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करते हैं।

यह आसन न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। वहीं, सुबह खाली पेट इस आसन का अभ्यास करने से पूरे दिन में फ्रेशनेस और ऊर्जा बनी रहती है।

हालांकि, अगर आपको घुटने, कूल्हे या कमर में कोई पुरानी चोट है, तो अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लें। गर्भवती महिलाएं इस आसन को संशोधित रूप में ही करें।


Related Stories
Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire